सोमवार, 31 दिसंबर 2012

मेरे जज्बात

 

आज की यह पोस्ट आमिर भाई के नाम समर्पित है।इनके बारे में कुछ कहने से पहले सोचा कुछ टूट फूटे शब्दों से अपने बारे में परिचय कराऊँ।ब्लोगिंग की दुनियां में अभी कुछ ही महीने पहले आया।पहले मैं इन्टरनेट पर हिंदी समाचार,आर्टिकल्स पढ़ता था। हिंदी ब्लोगों पर पहुंच न के बराबर थी।सोचता था वेबसाइट, ब्लॉग कैसे बनते है इनका खर्च कौन उठता है आदि।एक दिन ऐसे ही इन्टरनेट पर विचरण करते समय इंग्लिश के एक पोस्ट में लिखा था कोई भी ब्लॉग बना सकता है वो भी फ्री में।मेरी भी उत्सुकता जागी जैसे तैसे एक  ब्लॉग बना ली।फिर नाम क्या रखूं  क्या पोस्ट करूं कई सवाल सामने थे।फिर क्या था अपने ही नाम से Rajendra blog पर कुछ सुंदर वाल्पपेर्स का पोस्ट किया।

चुकि मुझे सुंदर वल्पपेर्स फोटो आदि से लगाव था,उसी को पोस्ट करता रहा। हिंदी में लिखने का अभी तक अनुभव् नही था।फिर लिखना मालूम हुआ,बचपन का जो गजलों का शौक था उसे एक दूसरा भूली बिसरी यादें ब्लॉग बना कर  लिखता  रहा।फिर एक दिन मन में आया के जो होम्योपैथिक चिकित्सा के सालों के अनुभव को भी शेयर किया जाय सो तीसरी ब्लॉग स्वस्थ जीवन बना ली। इन्ही दिनों मेरे सामने हिंदी लिखने में एक प्रोब्लम आ गयी।अभी तक किसी अनुभवी के सम्पर्क में नही था,पोस्ट पढ़ता था लेकिन टिप्पड़ी करने में संकोच करता था।फिर मैंने विनीत भाई और आम़िर भाई के ब्लॉग पर सर्वप्रथम ये टिप्पड़ी लिखी।
विनीत जी ( टिप्स हिंदी में )और आमिर जी  दोनों महानुभाओ ने जबाब दिया,चूकि विनीत जी से सम्पर्क नही हुआ,आमिर भाई ने लगे हाथ जबाब भी दिया और सम्पर्क करने की बहुत उत्सुकता दिखाई।

“Aapka ye sawal mila,lekin aapki email adress nhi mila isliye jawab yahan de rha hun.aap hindi typing hmeshan yahan kren........yahan aapko koi problem nhi hogi.http://www.google.com/transliterate/ 
Aamir Dubai15 Dec 2012
rajendar ji aap mujhe email kren ,aapka email adress mere paas aa jayega.Thanks


चूकि हम दोनों ही UAE में रहते है सम्पर्क  हुआ।उन्होंने हमारे  ब्लोग्स देखे और बोले इन ब्लोगों का स्वरूप परिवर्तित  चाहिए। फिर उन्होंने आपना कीमती समय देकर हमारे ब्लोगों की डिजायन की, सजाया, सवांरा और कायाकल्प कर  दी।इनके निस्वार्थ सहयोग के लिए हम सदा आभारी  रहेंगे।इनके सभी ब्लोग्स (मास्टर्स टेक टिप्स ,इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड और मोहब्बतनामा ) एव इनके पोस्ट बहुत ही उपयोगी हैं। हिंदी ब्लॉग प्रेमियों के सहयोग के लिए ये हमेशा तत्पर रहते हैं। इनके बारे में ज्याद क्या लिखू,ये सूर्य की किरणों के समान है जो बिना भेद भाव के सबके लिए हितकारी है।आशा है आगे भी ऐसे ही रौशनी की किरण बिखेरते रहेंगें।



शनिवार, 29 दिसंबर 2012

सबको जगा कर सो गयी वो ...........


   वह तो आँखें बंद कर  सो गयी लेकिन हमे जगा  गयी  वो,
   हमारे अंधक कूपो  में  की रौशनी की एक लौ जला गयी वो।
           आज जब वह चली गयी दरिंदो भरी  की दुनिया को छोडकर,
           अब देश के कर्णधरो के कानो में घंटी बजी है क्या  सोचकर।
  अनेको सवाल छोड़ गयी हमे कुम्भकर्ण रूपी नींद से जगाकर,
  क्या हम  देशवासी  कभी इंसाफ दिल पायेगे उस आत्मा को।
           काटों को अपने दामन में संजोकर चली गयी यम की डोली में,
           हमारा  फर्ज नही बनता कुछ पुष्प अर्पित करें उस झोली ...में। 


आज दरिंदगी की शिकार अबला की बंद जुबां पूछ रही है-पाप हिंसा का दहशत फ़ैलाने वालो क्या तुम्हारी जिन्दगी तुम पर बोझ नही है! 16 दिसम्बर से हमारी अवाम दोषियों के सजा के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहें  है। क्या हमारी सरकार हमारे कर्णधार पीडिता के परिवार को इंसाफ दिला पाएंगे,गहरी नींद से जगकर क्या कोई कठोर निर्णय ले पाएंगे।हमारी सरकार मौन क्यों है,क्यों नही सर्वसम्मत से कोई ऐसा कानून बना रही है की बलात्कार के किसी भी दोषी को ऐसी सजा दी जाय जो इंसाफ  का एक मिसाल हो। बलात्कार एव हत्या के इन दोषियों को तो फांसी से भी कोई कठोर सजा देना चाहिए।अपने देश का यह दुर्भाग्य ही रहा है की देश और समाज के लिए निःस्वार्थ भाव से जिम्मेवारी निभने वाले सृजनकर्ताओं का अभाव रहा है। हमारे नेता केवल ब्यान देने में आगे है।हमारी सरकार को प्रायोजित प्रदर्शन की आदत सी हो गया है।हमे हमारी सरकार को इस भूल को स्वीकार करना चाहिए की यदि दुष्कर्म के खिलाफ सजा का कोई कठोर प्रावधान होता तो हमे शायद यह दिन देखने को नही मिलता।आज आदर्शवाद की लम्बी चौड़ी बातें बखारने वाले बहुत  मिल जायेंगे पर उसे अपने जीवनक्रम में उतरने की भी हिम्मत होनी चाहिए।इतिहास साक्षी है हमारे द्रढ़ सकल्प के आगे बड़े से बड़े देव दानव भी पराजित हुए हैं। आज हमारे सामने इस मुद्दे पर कई सवाल उठ रहें है ......क्या हमारी सरकार ऐसे कानून बनाएगी जिससे अपराधियों में खौफ पैदा हो, क्या पीडिता की क़ुरबानी बेकार जाएगी,क्या दोषियों को फासी मिलेगी,क्या आने वाले दिनों में  दुराचारियों से समाज भयमुक्त होगा आदि आदि।
                                    लूटा बहन बेटियों के दामन् सर उठाये हुए है हम,
                                    खुद से खुद  की नजर  को  चुराए ....   हुए हैं हम।

बुधवार, 26 दिसंबर 2012

पत्थर से इन्सान



सोचा था कि अब चला गया हवाओं की  तरह,
गम दुसरे दिन फिर आ गया दीवानों की तरह।

पत्थर से इन्सान  के रिश्ते होते है बड़े अजीब ,
ठोकर किसी ने मारी कोई जल चढ़ा कर गया।

आया तो ऐसा आया नदियों में सैलाबों की तरह,
गया तो ऐसा गया जंगल की दनावल  की तरह।

सोचा था आएगा बिखरे चमन को बसाने के लिए,
पर आया भी तो लहरों  से झोपडी उड़ाने  के लिए।

सोचा की कट  जाएगी जिन्दगी भवरों की तरह,
गम दुसरे दिन फिर आ गया दीवानों  की तरह।






मंगलवार, 25 दिसंबर 2012

किस्मत




यही  तो   किस्मत   की  बात है, दिन गुजरते   जाते है।
पहले तो फूलो से खेलते थे,अब फूलो की ठोकर खाते है।
      शिकवा क्या करे तुम्ही पर,खुद शिकवा बन कर आते है।
      पल भर ठहरती हो मन पर,दिल में बेखुदी  भर जाती  है।
          इधर शबाब   बढ़ता जाता है, तेरे रूप  का   रुआब बढ़ता   जाता है।
          अधरों से पि लू अक जैम फिर,दिल में हसीन ख्वाब बढ़ता जाता है।
               तू  न इधर आती हो न दिल बहलाती हो,आती है जब तब याद आती है।
              बूंद बने जो सपनों की मोती बन के आती है,'राज'के आंसू बन के आती है


दीवानों की तरह


आप मेरे गलियों में आये हैं दीवानों की तरह,
मैं चला जाऊंगा कहीं  और बहानों  की तरह।

ऐसे न देखिये हमे हम दीवाना हुए जा रहें,

कसम खा के कह रहें हम परवाने हुए जा रहें।

हम तो मर जायेंगे अब यहाँ लाशो की तरह,

आप मेरे गलियों में आये हैं दीवानों की तरह,

ऐसे पलक ना झुकाइए शर्म के ......मारे मारे,

कितना प्यार करते हैं हमे बताइये ऐ  प्यारे।

हम पर भी बरस जाईये  बरसातों  की तरह,

आप मेरे गलियों में आये हैं दीवानों की तरह।

क्यों मिलते हैं हमसे अंजानो को तरह,

आ जाओ पास हमारे दीवानों की तरह।

दिल से जुदा "राज" को पहचानेगे किधर,

आप मेरे गलियों में आये हैं दीवानों की तरह।






शनिवार, 22 दिसंबर 2012

मुस्कान





""करता हूँ तन मन से बंदन 
            मैं जन मन की अभिलाषा का
                         अभिनन्दन अपनी संस्कृति का
                                          आराधना अपनी भाषा  का.""



"खोया जिसने अपनापन सब कुछ उसने खो .. दिया,
सच्चा दोस्त वही है बन्धु संग हँसा संग रो .. दिया।

आ जाये यदि कोई बिपदा आगे ..बढ़ -क़र  उसे झेले,
स्नेह सागर में नहला दे काटे जीवन के झण अकेले।

मन मन्दिर में किया उजाला मैल मन के धो ..दिया,
सच्चा दोस्त वही है बन्धु संग हँसा संग रो .....दिया।"




फूलों से झरा जो  पराग तेरी माथे की बिंदिया ..... ..बनी,
हँसा जो गुलाब चमन में तेरे गुलाबी गाल के लाली बनी।

तेरे सुर्ख अधरों ली जब कम्पन .. कमल ताल में खिल  गये,
जब ली तुमने अंगड़ाई चौकं मेघो ने नीर का साथ भूल गये।

तेरा सजना सवरना देख क़र फूलों में मुस्कान बिखर  गयी,
बागो में कोयल कुंके भवरों  का गुंजन कमल  को भा गयी।

ठंडी ठंडी हवा में न लहरा चुनरियाँ हवा भी सरमा जाएगी,
तेरे  रोम रोम से उद्भित  हँसी से दुनियां माधुरी हो जाएगी।











गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

Anmol Vachan (अनमोल वचन और सूक्तियां)




20.05.2017 (Today-207) 
"महान ब्यक्ति हमेशा हमारे बीच रहते है,अपने बताए गये आध्यातिम्क बातो के रूप में,अपने दिए गये महान विचारो के रूप में।संसार के अनेकानेक विद्वानों ने जीवन उपयोगी बाते कही हैं जिन्हें हम साधारण भाषा में अनमोल वचन कहते हैं अर्थात ऐसी बातें जो अनमोल हैं और जिनके द्वारा हम अपने जीवन में नई उंमग एवं उत्साह का संचार कर सकते हैं। यह पृष्ठ उन्ही महान महापुरूषों को समर्पित है।"

 "बुद्धिमानी से प्रयोग किये गये शब्द चुम्बक की तरह वक्ता या लेखक की तरफ आकर्षित करते है।बुद्धिमान लोग अपने चिंतन को आने वाली पीढियों के लिए लिखित में सुरक्षित रखने का प्रयास करते है।कालान्तर में लिखी सामग्री चरित्र का अंश बन कर उभरती है।"

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि अनमोल वचन का हमारी जिंदगी पर कितना प्रभाव पड़ता है, तो इसे अपने घर पर किसी ऐसी जगह पर लिख दें, ताकि आप इसे नियमित रूप से देख सकें। आप चाहें तो मोबाइल के स्क्रीन सेवर, डेस्कटॉप या लेपटाप या फिर कागज पर लिखकर दीवार पर चिपका सकते हैं। अगर आप अनमोल वचन को किसी ऐसी जगह पर लिखते हैं ताकि सुबह उठने के साथ ही इसपर नजर पड़ जाए, तो इससे आपकी जिंदगी में व्यापक बदलाव आएगा। आइए हम आपको कुछ ऐसे चर्चित अनमोल वचन के बारे में बताते हैं, जो आपको प्रेरित कर सकता है।
अनमोल वचन















बुधवार, 12 दिसंबर 2012

अश्को की बरसात (Ashkon ki barsat)

Bhula bhi de use jo bat ho gai pyare,
nye chirag jla rat ho gayi payare.

Teri nigahon aou chehra ko kaise dekhunga,
Kabhi jo tumse mulakat ho gayi payare.

Udas udas hai dil bujhe bujhe se sagar,
Yah kaisi shame khrabat ho gyi payare.

kabhi kabhi teri yaadon ki savli kht main,
Bahe jo ashk to barsat ho gayi payare.

Vfa ka nam n lena koai is jamane main,
Tum to dosti pr hi kurban hote rahe payare.

Tumhe to naj bahut doston pe tha ae "Raj"
Aalg thalg se ho kya bat ho gai payare.



"Habib jalil"

मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

अंधेरे दिल में


 तुम्हारी यादों को सीने से लगा रखा है,
 अंधेरे दिल में एक चिराग जला रखा है।
 जीने की उम्मीद जागी है तुमसे लाख कर,
हमने सेहरा को शबनम से साजा रखा है।
तुम्हारे इंतज़ार में खुली है कब से आंखें,
हमने  राहों में  पलको को बिछा  रखा है।
 हर लम्हा उन्ही कीयाद में तडपता है दिल,
दर्दे दिल को हमने पत्थरों सा दबा  रखा है।
 उनको भी नहीं मालूम कितना चाहते है हम, 
प्यार में उनके हमने खुद को भुला रखा है।
 जिंदगी है जब तक  सिर्फ उन्हें  ही चाहेंगे, 
 
दिल में "राज"  ने राज़ को छुपा  रखा है।





                            



सोमवार, 10 दिसंबर 2012

दिवाली की रौशनी


फिर दिवाली ला रही है रौशनी ,
मुश्किले बिखरा रही है रौशनी।
                 कहकहे थोड़े ब्यथाएँ अनतुली,
                 इस कदर  तरसा रही है रौशनी।
पथ प्रदर्शन की प्रथा को तोडकर,
और भी भटका रही है---रौशनी।
                 रश्मियों का दान लेकर सूर्य से,
                 चांदनी  कहला  रही है  रौशनी।
चाहते है जो कैद करना सूर्य को,
उन्ही को मसला रही है रौशनी।
                सूर्य,दीपक और जुगनु है गवाह,
                रौशनी  को  खा रही है- रौशनी।
दोस्तों तुम से शिकायत क्या करें,
जब हमे  फरमा  रही है--- रौशनी।
              "राज" कालगति किरणों को समझ ले,
               अन्यथा ज्वाला बन कर आ रही है रौशनी।

रविवार, 9 दिसंबर 2012

सिक्के के दो पहलू


हर ख़ुशी की आँखों में आँसू  मिले,
एक ही सिक्के के दो पहलू  निकले।
               कौन अपनाता मिला दुर्गन्ध को,
               हर किसी की चाह है खुशबु मिले।
अपने अपने हौसले की बात है,
सूर्य से भिड़ते हुए जुगनू मिले।
              रेत से भी निकल सकता है तेल,
              चाहत है वो कहीं बालू---- मिले।
आँकियें उन्माद -मद -तूफ़ान का,
सैकड़ो उड़ते हुए तम्बू----- मिले।

शनिवार, 8 दिसंबर 2012

आँसू


दर्द सीने  से उठा तो आँखों से आँसू निकले,
रात आयी तो गजल कहने के पहलु निकले।
              दिल का हर दर्द यु शेरो में उभर आया है,
              जैसे मुरझाये हुए फूलो में खुशबु निकले।
जब भी बिछड़ा है कोई शख्स तेरा ध्यान आया,
हर नये गम से  तेरी याद  के  पहलु--  निकले।
              अश्क उमड़े तो सुलगने लगी  यादे 'राज' की,
              खुश्क पत्तो को जलते हुए जुगनू--- निकले।











गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

रौशनी- गज़ल

मसरूफ हुए इतने हम दीप जलाने में,
घर को ही जला बैठे दिवाली मनाने में।
            ये दौर गुजरा है बस उनको मनाने में,
            क्या होगा खुदा अब अगले जमाने में।
मिट्टी के घरौदे वो याद  आज भी आते हैं,
 हम तुम बनाते थे बचपन के जमाने मैं।
            लग जाएगी लगता है अब और कई सदियाँ,
            इस दौर के  इंसा--  को  इन्सान  बनाने  में।
देखा जो तुम्हे मैंने महसूस हुआ यारब,
सदियाँ तो लगी होगी ये शक्ल बनाने में।
            हँस कर मुझे न देखो जज्बात जल न उठे,
            अब  चिंगारी ही काफी है आग लगाने में।
सब तुम पर निछावर  है वस  निछावर  है,
है रौशनी जितनी भी "राज" के खजाने में।





बुधवार, 5 दिसंबर 2012

निराशा-गज़ल


आ समन्दर के किनारे पथिक प्यासा रह गया,
था गरल से जल भरा होकर रुआंसा रह गया।
                    था सफर बाकि बहुत मजिल अभी भी दूर  थी,
                    हो गया बढना कठिन घिर कर कुहासा रह गया।
लग रहे नारे हजारो छप रही रोज लाखो खबर,
गौर से जब  देखा तो बन तमाशा रह  गया।
                    एक बुत गढ ने लगी  अनजान  में ही  मगर,
                    हादसा ऐसा हुआ की वह बिन तराशा रह गया।
छोड़ कर  आशा किसी का चल पड़ा बेचारा"राज",
आज  बादा लोगो का  बस  दिलासा  रह   गया।

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

मशवरा-गज़ल

घर से निकलोगी तो सोचा है किधर जाओगी,
हर तरफ तेज हवा है टूट कर बिखर जाओगी।
               इतना आंसा नही लफ्जो पर  भरोसा  करना,
               जब घर की दहलीज पुकारेगी किधर जाओगी।
शाम होते ही सिमट  जायेगे  सारे  तेरे रास्ते,
बहते दरिया से जहाँ होगे  वही ठहर जाओगी।
               हर नये जगह में कुछ यादें कडवी होती हैं,
               छत से दीवारें जुदा होगी तो डर जाओगी।
पहले हर चीज नजर आयेगी बेमानी सी,
फिर  अपने   ही  नजरो से  उतर  जोगी।
              "राज" के नेक मशवरे  पर अमल  करना,
               रास्ते के बिकट भवँर  से निकल  जाओगी।



सोमवार, 3 दिसंबर 2012

सदाए कैद करूं-गज़ल


सदाए कैद करूं  या आहटे  चुरा  ले जाउ,
महकते जिस्म की खुशबुए चुरा ले जाऊ।
                                तेरी अमानते महफूज रख न पाउँगा,
                                दुबारा लौट के आने का वादा न कर पाउँगा।
बला के शोर है तूफ़ान आ गया शायद,
कहाँ  का वक्त ऐ सफर खुद को ही बचा ले जाऊ।
                                कहना  है दरिया का  यह शर्त हार जायेगा,
                                जो एक दिन में उसे साथ बहा ले जाऊ।
अभी और न जाने कहाँ कहाँ भटकु,
कभी बहाया था दरिया में जो दिया ले जाऊ।



रविवार, 2 दिसंबर 2012

जीने की अरमान-गज़ल

                   
सांसे तो है मगर अब जीने की अरमान नही है,
देखा है जिन्दगी को इस कदर खुद की पहचान नही है।
                 दर्द है बिखरा है जहाँ में यहाँ से वहाँ  तलक,
                 बाँट ले गम थोडा सा ही ऐसा कोई इन्सान नहीं है  ।
खेल कर जी भर आग से कहने लगे है अब तो,
जलते तन मन के लिए बर्फ का सामान नही है।
                 गुल-ए-चमन में जग कर रात रात भर,
                 मायूस हो कहते है वो काँटों का बरदान नही है।
बुझेगी नही प्यास सुरा से,सुन्दरी से औ शबाब से,
जवानी तो दो घडी है हरदम तो इसका एलान नही है ।
                  लुट कर खुद गैर की आबरू दिन दहाड़े ही,
                  कहते है वो आदमी की शक्ल में भगवान नही है।
गवां दी उम्र सारी  मनमानी हरकतों के तहत।
थक गये तो कहते है सर पर आसमान नहीं है।
                  सभल जा अब भी थोडा वक्त है "राज",
                  जिन्दगी की राहों  को समझना आसन नही है।

जिस बात का डर था-गज़ल

जिस बात का डर था सोचा कल होगी,
जरखेज जमीनों में बिभार फसल होगी।

तफसील में जाने से ऐसा तो नही लगा,
हालात के नक्शों में अब फेरबदल होगो।

स्याही से इरादों की तस्वीर बनाते हो ,
गर ख़ूँ से तस्वीर बनाओ तो असल होगी।

लफ्जो से निपट सकती तो कब की पट जाती,
पेचीदा पहेली है बातो से न हल होगी।

इन अंधक सुरंगों में बैठे है तो लगता है,
बाहर भी अन्धेरे की बदशक्ल नकल होगी।

जो वज्म में आये थे बोल नही सके,
उन लोगो की हाथो में "राज" की गजल होगी।

तेरी वेवफाई (Teri vevfai)

Teri yaad dil se bhulane se pahme,
main roya bahut kht jlane se phle.

ye masum chehre bhi dete hain dhokha,
nhin smjhoge tum chot khane se phle.

jo pine ka tum men slika nhin hai,
chhlk jayega jam uthane se phle.

agr bevfai aapki main likhun,
kalam tut jaye chalane se pahle.

tum apne mahal ki bhi khuchh fikr krna,
garibo ka chhppr jalane se phle.

main duniyan ki roti ko phchanta hun,
jatayegi ahsa khilane se pahle.

lipt kr hr aek et se ro diye hmne,
purani haveli girane se pahle.

juban saf kr lijiye ae "Raj"
duaa ke liye hath uthane se pahle.

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

इंसानी चेहरे के पीछे- गज़ल



इंसानी    चेहरे के  पीछे  खूनी   मंजर  देखे  है,

और प्यार के उम्मीदों पर पड़ते पत्थर देखे है।


लहरों के पीछे हो जाना मुशिकल शायद नहीं रहा,
अपनी बस्ती में लोगो   के खौफ़जदा घर देखे  है।


जिसको हमने साथ किया था तन्हाई में चलने को,
न  वक्त में  उनके हाथ  में हमने  खंजर देखे है।


मंजिलो से कदमो को रिश्ता कितना मुश्किल है,
बरसातों में  कच्चे घर  के चुते  छप्पर  देखे   है।


अब तो चलना भी डर लगता है किसको हाथ साथ करे,
ऐ "राज"राह  बदल कर चलने वाले कितने रहवर देखे है।




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