शनिवार, 29 दिसंबर 2012

सबको जगा कर सो गयी वो ...........


   वह तो आँखें बंद कर  सो गयी लेकिन हमे जगा  गयी  वो,
   हमारे अंधक कूपो  में  की रौशनी की एक लौ जला गयी वो।
           आज जब वह चली गयी दरिंदो भरी  की दुनिया को छोडकर,
           अब देश के कर्णधरो के कानो में घंटी बजी है क्या  सोचकर।
  अनेको सवाल छोड़ गयी हमे कुम्भकर्ण रूपी नींद से जगाकर,
  क्या हम  देशवासी  कभी इंसाफ दिल पायेगे उस आत्मा को।
           काटों को अपने दामन में संजोकर चली गयी यम की डोली में,
           हमारा  फर्ज नही बनता कुछ पुष्प अर्पित करें उस झोली ...में। 


आज दरिंदगी की शिकार अबला की बंद जुबां पूछ रही है-पाप हिंसा का दहशत फ़ैलाने वालो क्या तुम्हारी जिन्दगी तुम पर बोझ नही है! 16 दिसम्बर से हमारी अवाम दोषियों के सजा के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहें  है। क्या हमारी सरकार हमारे कर्णधार पीडिता के परिवार को इंसाफ दिला पाएंगे,गहरी नींद से जगकर क्या कोई कठोर निर्णय ले पाएंगे।हमारी सरकार मौन क्यों है,क्यों नही सर्वसम्मत से कोई ऐसा कानून बना रही है की बलात्कार के किसी भी दोषी को ऐसी सजा दी जाय जो इंसाफ  का एक मिसाल हो। बलात्कार एव हत्या के इन दोषियों को तो फांसी से भी कोई कठोर सजा देना चाहिए।अपने देश का यह दुर्भाग्य ही रहा है की देश और समाज के लिए निःस्वार्थ भाव से जिम्मेवारी निभने वाले सृजनकर्ताओं का अभाव रहा है। हमारे नेता केवल ब्यान देने में आगे है।हमारी सरकार को प्रायोजित प्रदर्शन की आदत सी हो गया है।हमे हमारी सरकार को इस भूल को स्वीकार करना चाहिए की यदि दुष्कर्म के खिलाफ सजा का कोई कठोर प्रावधान होता तो हमे शायद यह दिन देखने को नही मिलता।आज आदर्शवाद की लम्बी चौड़ी बातें बखारने वाले बहुत  मिल जायेंगे पर उसे अपने जीवनक्रम में उतरने की भी हिम्मत होनी चाहिए।इतिहास साक्षी है हमारे द्रढ़ सकल्प के आगे बड़े से बड़े देव दानव भी पराजित हुए हैं। आज हमारे सामने इस मुद्दे पर कई सवाल उठ रहें है ......क्या हमारी सरकार ऐसे कानून बनाएगी जिससे अपराधियों में खौफ पैदा हो, क्या पीडिता की क़ुरबानी बेकार जाएगी,क्या दोषियों को फासी मिलेगी,क्या आने वाले दिनों में  दुराचारियों से समाज भयमुक्त होगा आदि आदि।
                                    लूटा बहन बेटियों के दामन् सर उठाये हुए है हम,
                                    खुद से खुद  की नजर  को  चुराए ....   हुए हैं हम।

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