बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

तुम्हारी यादें: हाइकू





1
 तुम्हारी यादें
आ रही है बहुत
तड़पाती है।
 
2
इश्क के दर्द 
नजदीक से देखा 
देते है जख्म।

3
पुकार रही 
घर की दहलीज 
इन्तजार है।
 
4
आँखों के आँसूं 
रुका न अबतक 
बने तलाब।
 
5
नेक सलाह 
है अमल करना 
                तुम्हारा काम।                
                                                                                                                                                            


चित्र Google से साभार।
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34 टिप्‍पणियां:

  1. अनुठा खुब
    आपके हाईकू हैँ
    प्रिय बहुत ।

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  2. भाई जी इतने ग़म का जीवन में क्या करना | जिनको कद्र नहीं उनके लिए क्या रोना | अपना जीवन सिर्फ अपना है किसी के लिए इसे ख़राब क्या करना | खुल कर जियो और जीने दो की पद्दति अपनाएं और सदा खुश रहें | आभार

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    जवाब देंहटाएं
  3. राजेन्दर जी बहुत अच्छा ,सुन्दर आपके उपर बिती हुई कहानी तो नही ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. नहीं भाई साहब बाल बच्चे वाले हैं,आभार आपका ।

      हटाएं
  4. यादों को संजोती बहुत बढ़ियाँ हाइकु.....
    :-)

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर,प्रसंसनीय बेहतरीन हाइकू,,,,राजेन्द्र जी बधाई,,,,

    RECENT POST बदनसीबी,

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर है आपका हाइकू,मन को बिचलित करने वाला।

    जवाब देंहटाएं
  7. भाव बिम्ब ,भावों का कुहाँसा लिए हैं हाइकु .बहुत उत्कृष्ट कोटि पोस्ट .

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर आपकि हाइकू है

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत अच्छा ,सुन्दर हाइकू

    जवाब देंहटाएं
  10. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    जवाब देंहटाएं
  11. आँख के आंसू
    रुके न अब तक
    बना तालाब

    बहुत सुंदर हाइकू

    जवाब देंहटाएं
  12. सुंदर भावपूर्ण हाईकू
    बधाई

    जवाब देंहटाएं
  13. सुन्दर हाइकू .... गहन भावों से भरपूर!

    जवाब देंहटाएं
  14. लाजवाब सभी हाइकू .. गहरा अर्थ कुछ लाइनो में लिए ....

    जवाब देंहटाएं
  15. हर हाइकू....अपना गहरा अहसास दे रहा है ....
    शुभकामनायें!

    जवाब देंहटाएं
  16. पुकार रही
    घर की दहलीज
    इन्तजार है।
    बहुत अच्छा हाइकू लगा....
    सारिका मुकेश
    http://sarikamukesh.blogspot.in

    जवाब देंहटाएं
  17. पुकार रही
    घर की दहलीज
    इन्तजार है।
    बहुत अच्छा हाइकू लगा....
    सारिका मुकेश
    http://sarikamukesh.blogspot.in

    जवाब देंहटाएं

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