गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

आने का शुक्रिया



चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया
पत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रिया 
        
जागा रहा तो मैंने नए काम कर लिए
ऐ नींद आज तेरे न आने का शुक्रिया


सूखा पुराना जख्म नए को जगह मिली
स्वागत नए का और पुराने का शुक्रिया 
        
आती न तुम तो क्यों मैं बनाता ये सीढ़ियाँ
दीवारों, मेरी राह में आने का शुक्रिया


आँसू-सा माँ की गोद में आकर सिमट गया
नजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया 
        
अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया
                                           

गम मिलते हैं तो और निखरती है शायरी
यह बात है तो सारे जमाने का शुक्रिया
चलते चलते...    
  

बोलो फिर कैसे कटे, यह जीवन की रात
सुना रहा है हर कोई, बस मुर्दों की बात.
आभार-कुँअर बेचैन



"आप सब को नव सवंत्सर २०७० की हार्दिक मंगलकामनायें"
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52 टिप्‍पणियां:

  1. अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
    यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया .... वाह

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  2. इस नज्म हम सब के लिए शेयर करने का शुक्रिया।

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  3. सच कहा गम मिलते हैं तो निकलती है शायरी। यहां मैं शायरी का अर्थ साहित्य को लेकर ले रहा हूं। लेखक जितना पीडित, दुःखी, अभाव में रहता है उतना ही अच्छा लिखता है। कारण पीडितों का सुनने के लिए किसी के पास समय नहीं तो वह कागजों पर उतारना पसंद करता है।

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    1. अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आपका शुक्रिया.

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  4. अच्छी गजल, इसमें शामिल करने के लिए शुक्रिया !

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  5. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 13/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  6. अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
    यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया ...

    वाह ... लाजवाब शेरों से सज्जित गज़ल ... ये खेर बहुत खाद लगा ...

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  7. बहुत ही सुन्दर रचना भाई जय माता दी खासकर ये दो अशआर दिल को छू गए इनके लिए विशेष दाद कुबुले फरमाएं.
    आँसू-सा माँ की गोद में आकर सिमट गया
    नजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया

    अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
    यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया

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  8. इतनी अच्छी रचना के लिए आपको भी शुक्रिया :)

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  9. राजेद्र भाई बहुत सुन्दर ग़ज़ल | बेहद उम्दा | आफरीन

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  10. आँसू-सा माँ की गोद में आकर सिमट गया
    नजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया ............बहुत बढ़िया।

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  11. ...नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  12. बहुत उम्दा ग़ज़ल...हरेक शेर दिल को छू जाते हैं...

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  13. बहुत ही सुन्दर बेहतरीन शेर,आभार.

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  14. आँसू-सा माँ की गोद में आकर सिमट गया
    नजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया

    bahut hi khubsurat sher,abhar.

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  15. बहुत ही सुन्दर बेहतरीन,नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं।

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    1. मनोज जी आपको भी नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  16. बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल.नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  17. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुतीकरण.नवरात्रि की हार्दिक मनोकामनाएँ.

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    1. आपको भी नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  18. अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
    यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया,
    इतनी बेहतरीन शेर के लिए आपको भी शुक्रिया जनाब.

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    1. आपको भी नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  19. उत्कृष्ट प्रस्तुति....आप को भी नव सवंत्सर २०७० की हार्दिक मंगलकामनायें

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    1. आपको भी नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं।

      हटाएं
  20. क्या ग़ज़ल की प्रस्तुति दिए हैं बहुत बहुत आभार.आप को भी नव सवंत्सर २०७० की हार्दिक मंगलकामनायें

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  21. क्या खूब कहा...बेहतरीन.
    चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया
    पत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रिया

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    1. आपको भी नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  22. बहुत बढ़िया ग़ज़ल ,नवरात्री और नववर्ष की शुभकामनाएं
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  23. बढ़िया गजल बन्दुवर
    http://guzarish66.blogspot.in/2013/04/1.html

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  24. आती न तुम-----राह में आने का शुक्रिया’
    बहुत खूब,चोट भी खाई और हंस कर

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  25. झुलसाते झंझावात,जीवन है या आग है
    ऐसे में दो पल रस बरसाने का शुक्रिया.....

    आभार आदरणीय...

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  26. बहुत सुन्दर। लाजवाब!
    जितना कहा जाए उतना ही कम है
    लिखने के इस अंदाज का शुक्रिया!
    आपको ढेरों साधुवाद इस खूबसूरत नज़्म के लिए।

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  27. बहुत सुन्दर....बेहतरीन रचना
    पधारें "आँसुओं के मोती"

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आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है,आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है, आपके कुछ शब्द रचनाकार के लिए अनमोल होते हैं,...आभार !!!