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शनिवार, 24 अक्तूबर 2015

"आनन्द"

happiness के लिए चित्र परिणाम
वह आनन्द क्या है,
जिसे मैं खोज रहा हूँ?
दौड़ जीतना  तो नहीं,
बल्कि असफलता का परिचय पाना है,
क्योकि इसी के द्वारा  मैंने दौड़ना सीखा है। 
संदेहों से भयभीत नही होना है,
क्योकि इन्होने ही मुझे दिखाया कि कहाँ पथ संकीर्ण है-
निकल पाना दुष्कर है। 
जब भी क्लान्ति और पीड़ा ने घेरा 
अपने चतुर्दिक फैली शक्तियों के माध्यम से 
मैं अपनी क्षमतावर्द्धन के मार्ग ढूंढ लेता हूँ। 
और खड़ा हो जाता हूँ-
विश्व संरचना की पंक्ति में 
चकित, विस्मित, पुलकित !

मंगलवार, 7 जनवरी 2014

हास्य कविता-काका हाथरसी


सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा
हम भेड़-बकरी इसके यह गड़ेरिया हमारा


सत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही है
हड़ताल क्यों है इसकी पड़ताल हो रही है
लेकर के कर्ज़ खाओ यह फर्ज़ है तुम्हारा
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा.


चोरों व घूसखोरों पर नोट बरसते हैं
ईमान के मुसाफिर राशन को तरशते हैं
वोटर से वोट लेकर वे कर गए किनारा
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा.


जब अंतरात्मा का मिलता है हुक्म काका
तब राष्ट्रीय पूँजी पर वे डालते हैं डाका
इनकम बहुत ही कम है होता नहीं गुज़ारा
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा.


हिन्दी के भक्त हैं हम, जनता को यह जताते
लेकिन सुपुत्र अपना कांवेंट में पढ़ाते
बन जाएगा कलक्टर देगा हमें सहारा
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा.


फ़िल्मों पे फिदा लड़के, फैशन पे फिदा लड़की
मज़बूर मम्मी-पापा, पॉकिट में भारी कड़की
बॉबी को देखा जबसे बाबू हुए अवारा
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा.


जेवर उड़ा के बेटा, मुम्बई को भागता है
ज़ीरो है किंतु खुद को हीरो से नापता है
स्टूडियो में घुसने पर गोरखा ने मारा
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा.






मंगलवार, 24 सितंबर 2013

आपका साथ


जिस दिन से 
तुम आई मेरी जिंदगी मे 
जीवन के प्रत्येक दिन 
मानो दिवाली है. 
तुम से दूर रहकर 
नही कर सकता कल्पना 
हर पल महसुस करता 
अंतरात्मा की आवाज 
जिस में हम एक साथ 
कर रहें हैं वीणा का वादन 
साथ बिताये हसींन लम्हे 
हरपल आँखों के सामने 
मानों चल रहा है चलचित्र 
अपनी आँखों के सपने 
पाता हूँ तुम्हारी आँखों में 
जीवन का अपना हर धागा 
है सुलझा हुआ 
दिल की आत्मीयता दिव्य बन जाता है.
आपकी बाँहों का सहारा 
मुझे लगता है मुझे मिल गया है 
पूरी दुनिया के आकर्षण 
हमारा प्यार एक मंदिर की तरह 
जीवन के हर उतार चढाव में 
मिला हमेशा तुम्हारा साथ 
धन्य है उस इश्वर का 
जो भेजा तुम्हे हमारी 
जिन्दगी में।

******

सोमवार, 20 मई 2013

"जबकि मैं मौन हूँ"





जबकि मैं मौन हूँ,
मौन रह कर क्या
बता पाउँगा इस दुनियाँ को
मेरे दिल में भी कुछ जज्बात मचलते हैं
दिलों से बर्फ पिघलते हैं
मैं भी आशा रखता हूँ की
प्यार की कलियाँ महके
सदभावना की नदियाँ बहे
मेघ के रह ताल पर
प्यार की बरसात हो
मैंने तो चाँद को भी देखा है हमेशा
चकोर की नजर से
चकाचौंध से भरी इस दुनियाँ में
मेरी भी चाहत है
किसी दिल रूपी प्रेम वीणा का
अछूता तार बनूँ
कोई मेरे हृदय के मौन भाषा को समझे
मैं तो भटकता हूँ रौशनी के लिए
पर गगन में कहीं कोई तारा ही नही
लगता है यह इस सदी का
कोई खतरनाक हादसा है
जो आज तक समझ ही न पाया.

बुधवार, 8 मई 2013

"मेरी विवशता"





मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था.
गति मिली, मैं चल पड़ा,
पथ पर कहीं रुकना मना था
राह अनदेखी, अजाना देश,
संगी अनसुना था.
चाँद सूरज की तरह चलता,
न जाना रात दिन है
किस तरह हम-तुम गए मिल,
आज भी कहना कठिन है.
तन न आया माँगने अभिसार
मन ही जुड़ गया था
मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था.
देख मेरे पंख चल, गतिमय
लता भी लहलहाई
पत्र आँचल में छुपाये
मुख-कली भी मुस्कुराई
एक क्षण को थम गए डैने
समझ विश्राम का पल
पर प्रबल संघर्ष बनकर
आगई आंधी सदल-बल
डाल झूमी, पर न टूटी
किंतु पंछी उड़ गया था
मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था.
************************
ध्यान तक विश्राम का पथ पर महान अनर्थ होगा,
ऋण न युग का दे सका तो जन्म लेना व्यर्थ होगा।

                              सादर आभार:शिवमंगल सिंह 



बुधवार, 1 मई 2013

चुनावों की तैयारी





चुनावों की तैयारी
चल रही है जोरो पर
आम जनता को
लुभाने के लिए
कितने कारखाने लगवायें हैं
चमकीले लोलिपाप की
टोपी खद्दर पहन कर
निकलेंगे बाहर
भ्रष्ट राजनीती की नालियों से
फिर देंगे झांसा आगे की खुशहाली का
चुटकी भर खुशहाली
पाने की लालच में हम
बिक जायेंगे इन मवालियों के हाथ
जुटा लेंगें अपने चारो तरफ भीड़
गूंज उठेगा मैदान
खरीदी हुई तालियों से,
कागजो पर ही बनायेंगे पुलों के नक्से
देश के नव निर्माण की
करेंगे बड़ी बड़ी बातें
देंगे शांति समृद्धि का आश्वासन
चुनावों के बाद
मिलेगी जब मखमली कुर्सी
भूल जायेंगे किये वादों और आश्वासन को
मौज मस्ती में ठाट से जिएंगें
और जनता का ही खून पियेंगे.

मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

"खुली आँखों से ख्वाब"





                                                                                                                                                                 
देखता रहा,
खुली  आँखों से ख्वाब
जहां में फैली हुई
हैवानियत के मंजरों को
हर पल होते हुए
कत्ल,चोरी.रहजनी और दुराचार को 
सुख-चैन लूटते हाथों से
मिलती ब्यथाएं अनतुली
थरथराती बुनियादें
दम बेदम फरियादें
खौफ का एहसास कराती
खून से लथपथ हवायें
शाम होते ही
सिमटते सारे रास्ते
मची है होड़ हर तरफ
धोखा,झूठ,फरेब और बेईमानी की
नेकी की राहों में फैली
बिरानगीं और तीरगी का बसेरा
पहलू बदल कर ली अंगडाई
पर न कोई इन्कलाब दिखा
जी रहे हैं सभी यहाँ
आपसी रंजिसों के साथ
भला कब तक ?
ये भी कोई जीना है.
                                                                                                  

रविवार, 10 मार्च 2013

कामयाबी की मंजिलें



 

हर तरफ छाया है अँधेरा
दिखता नही सवेरा
जिन्दगी में है बेरुखी का आलम
हर डाल के पत्ते है सुर्ख
खो गया है मंजिलों के रास्ते
नहीं रहा अब खुशियों से वास्ता
जिन्दगी के इम्तिहाँ
तोड़ रहें मेरा हौसला
रुकने के कगार पर
जिन्दगी के कामयाबी के कारवाँ
मेरे जज्बात उड़ रहें
बिपरीत हवाओं के साथ
जिन्दगी की तन्हाई लग रही
तूफान के बाद छाये सन्नाटे की तरह
खुशी के नगमे भी लगते
दर्द भरी शायरी की तरह
जिन्दगी के उलझे हैं सारे तार
मकड़ी की जालों की तरह
अब तो दोस्तों की सलाहियत भी
लगते रेगिस्तानी काँटों की तरह
पर,
जिन्दगी टूट कर बिखरने से पहले
सोये आत्मविश्वास में
हुआ एक उजाला सबेरा
लगता अब तोड़ पाउँगा
उलझनों का तिलस्म
जीवन है संघर्ष 
लड़कर ही इसे पाना है
अब दूर नहीं रही
मेरी कामयाबी की मंजिलें. 
 

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

माँ,तुम्हारी यादें





माँ,
आज आ रही है 
तुम्हारी यादें बहुत 
तन्हा छोड़ मुझे 
जल्दी चली गयी तू 
हर पल रखा 
मेरी  ही खुशियों का ख्याल 
कभी भी न आने दी आँखों में नमी 
अब हर पल रहती 
तेरी यादों में आँखें नम 
तुम्हारी लोरियों की गूंज 
अब भी गूंज रही कानो में 
नहीं कर पा  रहा समझौता 
वीराने जिन्दगी से
आदत जो रही 
तुम्हारी प्यार दुलार का 
दुलार भरा हाथों का स्पर्श 
महसूस करता स्वप्निल नींद में 
फूलों जैसे  गोद में मचलना 
तुम्हारा मुस्कराना 
नींद से जग जाता अचानक 
ढूढने लगता तुम्हार चेहरा 
चमकते चाँद सितारों में 
माँ,तुम याद आ रही हो बहुत। 









 

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

दूरियाँ



 







पिघलती बर्फ पर चलना
जितना मुश्किल है,
उससे अधिक मुश्किल है
तुम्हारी आँखों को पढ़ना।
सारे शब्द
जंगल के वृक्षों पर
मृत सर्पों की तरह लटके हैं
क्योंकि ये तुम तक किसी तरह
पहुँच नहीं सकते
और जो मुझ तक
पहुँचते हैं
वे सिर्फ दस्तक देते हैं
द्वार खुलने की प्रतीक्षा नहीं करते।
******************

माना  की  प्यार  मेरा  इक  धोखा  है ...
कुछ धोखे भी बहुत हसीन हुआ करते है।                                  (आभार-कालांतर) 

 

रविवार, 17 फ़रवरी 2013

"एक कली"





मैंने एक कली को देखा
जो कर रही थी इंतजार 
पल पल क्षण क्षण 
अपने खिल जाने का 
अपने मुस्कराने का 
अपनी खुशबु सिमटने का 
आखिर वह दिन आ ही गया 
कली अधखिली और 
आगे खिलने  लगी
मंद मंद पवन के साथ 
झूम कर  खिलखिलाने लगी 
फैला खुशबु उपवन में 
भौरे करने लगे गुंजन
कोयल भी प्रेमगीत गाने लगी।


"अक्स खुशबु हूँ बिखरने से न रोके कोई
और बिखर जाऊं तो मुझको न समेटे कोई"

                                                                                                (आभार )
                                                                                                                                                                                                                                                               

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

फूल





तुमने कहा था-तुम्हे फूल बहुत पसंद हैं
और इसीलिए मैं 
ढेर सरे फूलों के बीज  लेकर आया हूँ 
किन्तु 
तुम्हारे घर के पत्थरों  को देखकर 
सोचता हूँ  
इन बीजों को क्या करूं 
अच्छा होता 
मैं इन बीजों के साथ 
मुठ्ठी भर मिट्टी भी लाता 
और अँजुरी हथेली में ही 
हथेली की ऊष्मा तथा तुम्हारी आँखों की नमी से 
अँजुरी भर फूल उगाता।

 
 
हमने तो हमेशा काँटों को भी नरमी से छुआ है,
लेकिन लोग वेदर्दी हैं फूलों को भी मसल देते। 
                                                                                     (आभार डॉ रिपुसूदन जी का)

                                                                     


            

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

धागा प्रेम का






                         रोक रही हूँ छलकते आंसुओं को 
                         जब मिलोगे करूँगी अर्पित तुझे ही 
                         आंसुओं  का अर्घ्य शीतल हेम सा 
                         मुंह  फेर रुखसत हो गये 
                         मुड़कर  अश्कों  भरी नयनो को देखा ही नहीं  
                         रहे  हमेशा वफा में पावँ लिपटे हुए 
                         बीते सौ कहानियों में से क्या कहूँ 
                         साथ नही है कोई आंसुओं  के तिजारत में 
                         जब भी मिलोगे 
                         आँखों में आँसू लबो को हँसता  पाओगे 
                         आँसू  भरे दामन से मुंह   ढाँप रहें 
                         कर रहें हैं आपका इंतजार 
                         याद रखना वस  यहीं 
                         सबंध अपना जोड़ता है 
                         वज्र  से गुरु,फूलों से मृदु एक धागा प्रेम का।

                                     (चित्र Google से साभार)                      

बुधवार, 16 जनवरी 2013

दुष्प्रवृतियाँ




       तुम कब आओगे प्यारे,
       आज फिर पापियों का है डेरा,
       लूट-पाट बलात्कार का हुआ बाजार गर्म 
       समाज में छाया है अँधियारा 
       मानवता पर दानवता है भारी 
       चारो ओर फैली दुष्प्रवृतियाँ
       होड़ लगी है एक दूसरे को कुचलने की 
       पाप पतन का बढ़ता बोलबाल 
       हर तरफ फैले हैं दुःशासन 
       हैं तत्पर नोचने को बेटियों के दामन 
       अंतहीन है इनकी सीमाएं 
       उनमे से कुछ रहते साथ हमारे 
       जब मिलेगा मौका 
       नोच लेगे पंख हमारे 
       दिन पर दिन हो रहे हालात बदतर
       हर तरफ है फैला दुराचारियो राज 
       इस हैवानियत की दुनियाँ में 
       तुम आओगे प्यारे।
                                                                           

रविवार, 6 जनवरी 2013

परायी स्त्री




यहाँ पति का घर, वहाँ पिता का घर,
उधर शायद पुत्र का घर,
पिता घर परायी पराये घर जाना है,
पति के घर परायी पराये घर से आयी है,
पुत्र के घर परायी .........शायद पुरानी है,
ऐसा जगह कहाँ  जहाँ वो परायी नही ?
क्या परायी स्त्री हमेशा परायी रहेगी,
परायी स्त्री ही हमारी माँ,बहन और बेटी है,
बेटी को परायी कहना क्या तुम्हे स्वीकार है,
परायी बेटी के  क्या है नसीब में,
क्या वह परायी ही रहेगी।

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