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सोमवार, 20 मई 2013

"जबकि मैं मौन हूँ"





जबकि मैं मौन हूँ,
मौन रह कर क्या
बता पाउँगा इस दुनियाँ को
मेरे दिल में भी कुछ जज्बात मचलते हैं
दिलों से बर्फ पिघलते हैं
मैं भी आशा रखता हूँ की
प्यार की कलियाँ महके
सदभावना की नदियाँ बहे
मेघ के रह ताल पर
प्यार की बरसात हो
मैंने तो चाँद को भी देखा है हमेशा
चकोर की नजर से
चकाचौंध से भरी इस दुनियाँ में
मेरी भी चाहत है
किसी दिल रूपी प्रेम वीणा का
अछूता तार बनूँ
कोई मेरे हृदय के मौन भाषा को समझे
मैं तो भटकता हूँ रौशनी के लिए
पर गगन में कहीं कोई तारा ही नही
लगता है यह इस सदी का
कोई खतरनाक हादसा है
जो आज तक समझ ही न पाया.

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