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शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

मत मारो माँ




 
       माँ ,माँ,ओ मेरी माँ              
तुम सुन रही हो मुझे
मैं तो अभी तेरी कोख में हूँ 
जानती हूँ एहसास है तुझे
आज मैंने सुना 
पापा की बातें
उन्हें बेटी नही बेटा चाहिए 
मैं बेटी हूँ,इसमें मेरा क्या दोष 
मईया मैं  तो तेरा ही अंश  
तेरे ही जिगर का टुकड़ा 
तेरे ही दिल की  धडकन 
क्या तुम भी 
मुझे मरना चाहती हो 
मुझे मत मरो माँ 
मुझे जग में आने दो न 
मैं तेरी  बगिया की कली 
तेरा जीवन महका दूँगीं 
तेरे सपने सच कर  दूँगी 
जीवन के हर पग पर 
तेरा साथ न छोडूंगी 
तेरा दुःख मेरा दुःख होगा 
माँ समझाना पापा को 
मैं पापा पर न बनूँगी बोझ 
पढ़ लिख कर 
छूऊँगी जीवन के उच्च शिखर को 
एक दिन करेंगे फक्र मुझपर 
बनूँगी लक्ष्मी घर की तेरी 
माँ ओ मेरी प्यारी माँ 
अजन्मी बेटी तुझे पुकार रही 
मत करना मुझे मशीनों के हवाले
मत मारना मुझे।
 
                                                       
 
                                                                                                                     
 एक प्रयास,"बेटियां बचाने का".......


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