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शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

"सफलता का रहस्य" (The secret of success)

जीवन में सफल होना कौन नही चाहता, हम अपने अपने तरीके अपना कर जीवन में सफल होने का प्रयत्न करते रहते हैं।हर व्यक्ति की मूलभूत चाहत होती है कि उसके जीने के मायने हों। वह इतना सक्षम हो कि न केवल अपनी वरन अपने परिजनों-परिचितों की भी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति कर सके। समाज में उसका सम्माननीय स्थान हो।  कोई व्यक्ति व्यवसाय करता है, कोई व्यक्ति नौकरी करता है तो कोई अन्य उद्योग करता है। जीवन में सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य अपना कर उस का चिंतन -मनन करो ,उसे अपना जीवन बना लो अपनी सम्पूर्ण शक्ति को लगा दो अन्य विचार त्याग दो । दृढ़ता के साथ उसे पूरा करने की इक्षा करो । दृढ़ता में बड़ी ताकत होती है । प्रबल इक्षा शक्ति सफलता जरुर देगी ।जो लोग मंजिल पर नहीं पहुंच पाते, वे इसके लिए अपने भाग्य को कोसते हैं और इसे नियति मानकर बैठ जाते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम है कि जीवन में सफलता पाने के लिए अपने भीतर कुछ विशिष्ट गुण पैदा करने पड़ते हैं जिन्हें हम सफलता के सूत्र भी कह सकते हैं। यहां कुछ ऐसे ही सूत्रों की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें आत्मसात् करके आप अपने कार्य क्षेत्र में सफल हो सकते हैं।
आत्मविश्वास : प्रत्येक व्यक्ति निरन्तर विकास और सफलताओं के ख्वाब संजोता है लेकिन जब ख्वाब टूटने लगते हैं तो वह निराश व तनाव को अपने ऊपर हावी कर लेता है। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि आज के प्रतिस्पर्धा  वाले युग में कोई भी कार्य कठिन ज़रूर हो सकता है परन्तु असंभव नहीं। ज़रूरत है तो बस आत्मविश्वास की। ऐसी धारणा है कि मनुष्य की आधी क्षमता शरीर और कौशल के साथ जुड़ी होती है, और शेष क्षमता आत्मविश्वास के सहारे टिकी रहती है, परन्तु सभी इसका उपयोग नहीं कर पाते, जो करते हैं सफलता एक न एक दिन उनके कदम चूमती है। आत्मविश्वास से ही मनुष्य के भीतर की क्षमता जाग्रत होती है। कई लोगों में योग्यता व क्षमता तो होती है लेकिन आत्मविश्वास नहीं होता, इसलिए सफलता भी इनसे दूर रहती है। सफलता तभी मिलेगी जब आप अपनी क्षमताओं पर विश्वास करते हुए अटूट लगन व मेहनत से काम करें।
किसी भी कार्य की सफलता में जितना बड़ा योगदान हमारे अभ्यास और परिश्रम का होता है, उतना ही आत्मविश्वास का भी होता है। मनोवैज्ञानिक आत्मविश्वास को प्रेरणा का ही एक आयाम मानते हैं, जितनी अधिक प्रेरणा होगी, उतना ही अधिक आत्मविश्वास और सफलता की संभावना होगी। आत्मविश्वास बढ़ाने के कई तरीके हो सकते हैं। अपने अतीत की सफल घटनाओं को याद करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। अपना कोई आदर्श भी बनाया जा सकता है।
अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहते हुए लगातार परिश्रम से अपने आत्मविश्वास को जगाया जा सकता है। इसी के बल पर अपनी संकल्प शक्ति को भी मज़बूत किया जा सकता है। आत्मविश्वासी बनकर आप व्यक्तिगत सफलता तो पाएंगे ही, समाज में भी आप को सम्मान मिलेगा।
इच्छाशक्ति : लक्ष्य प्राप्ति के लिए यह ज़रूरी है अदम्य इच्छाशक्ति का होना। इच्छाशक्ति ही मनुष्य को उसके लक्ष्य तक लेकर जाती है। चाहे रास्ता कितना ही लंबा क्यों न हो, चाहे कितना ही त्याग क्यों न करना पड़े, इच्छाशक्ति ऐसी ऊर्जा या ताकत है जो मनुष्य को उसके उद्देश्य तक अवश्य पहुंचाती है। जीवन में गंभीर चुनौतियां क्यों न हों, यदि व्यक्ति में चुनौतियों का सामना करने की इच्छाशक्ति है तो कुछ भी असंभव नहीं है। प्रबल इच्छाशक्ति रखने वाला कोई भी व्यक्ति कार्य कुशल बन सकता है। इच्छाशक्ति सफलता की कुंजी है, इसलिए अपने भीतर इसे पैदा करें। इच्छाशक्ति के बल पर ही साहसी, परिश्रमी एवं धुन के पक्के लोग विश्व कीर्तिमान रचते हैं।
लक्ष्य तय करें : बिना दिशा निश्चित किए यदि समुद्र में एक जलयान को छोड़ दिया जाए तो इसका क्या परिणाम होगा, आप स्वयं अंदाज़ लगा सकते हैं। इधर-उधर डोलता हुआ जलयान या तो समुद्री चट्टानों से या फिर तट से टकराकर समुद्र में डूब जाएगा, लेकिन जब उसी जलयान की दिशा निश्चित होगी तो समुद्र को चीरते हुए वह अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा। यही उदाहरण हमारे जीवन पर भी लागू होता है। बिना अपना लक्ष्य तय किये हम अपनी मंजिल पर नहीं पहुंच सकते। भाग्य के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं।
योग्यता : जीवन का लक्ष्य हमारे सामर्थ्य, इच्छाशक्ति और योग्यता पर आधारित होना चाहिए। लक्ष्य प्राप्ति के लिए सबसे पहले यह ज़रूरी है कि आप यह तय करें कि आप किस रास्ते पर चलना चाहते हैं। उसके बाद यह सोचें कि किन साधनों से आप उस रास्ते पर चलते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। जैसे-जैसे आप रास्ते पर आगे बढ़ते जाएंगे, आपके साधन भी बढ़ते जाएंगे। यदि आप असफलता की असहनीय वेदना से बचना चाहते हैं तो सिर्फ लक्ष्य ही दिखाई देना चाहिए। वास्तव में लक्ष्य तय कर लेना ही आधी सफलता हासिल कर लेना है। अपने लक्ष्य को सकारात्मक तरीके से निर्मित करना चाहिए न कि नकारात्मक भाव से। लक्ष्य का उद्देश्य आपको गतिशील बनाए रखने के लिए प्रेरित करने के लिए होना चाहिए। जब आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें तो यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आप अपनी क्षमताओं व शक्तियों का पूरा उपयोग कर रहे हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए आपको अपनी क्षमताओं का भी पता होना चाहिए। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने जीवन में बहुत आगे बढ़ सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं किया और अपने लक्ष्य को सीमित दायरे में ही रखा।
समय का सदुपयोग : जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के साथ चलने व उसका सदुपयोग करने वाला व्यक्ति ही जीवन में कामयाबी के शिखर पर पहुंच सकता है। योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया कार्य समय सेपूरा होता है और अपेक्षित परिणाम देता है, इसलिए समय के महत्व को समझें।
इस प्रकार के कुछ टिप्स अपनाकर आप भी एक सफल व्यक्ति बन सकते हैं। तो फिर देर किसी बात की? हो जाइए आप तैयार और अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दीजिए।

बुधवार, 15 मई 2013

"सफलता के मूल-मंत्र"(Key of Success)



''गिरते हैं घुड़सवार ही मैदान -ए -जंग में , वो तिफ्ल क्या गिरेंगे जो चलते है घुटनों के बल'' 
अर्थात प्रयास करने वाले को ही ठोकर लग सकती है या संभवत: सफलता या असफलता मिल सकती है,लेकिन  जो प्रयास ही नहीं करते उन्‍हें न सफलता मिल सकती है और न असफलता.
यदि आप सफलता चाहते हैं तो आपको प्रयास तो करना ही पडेगा.आपको कष्टों को अपनाना ही होगा। यदि कष्टों से घबड़ा कर प्रयास ही छोड़ देंगे तो फिर सफलता के बारे में सोचना ही बेकार है. जीवन में सफलता पाने के लिये आशावादी होना चाहिये.निराशा आपको गहरे खन्दक में ले जायेगी.चिंता चिता के समान है. चिंता को त्यागना अत्यावश्यक है। यदि आप सोचते हैं कि किसी समस्या को हल किया जा सकता है तो चिंता करने की क्या आवश्यकता है और यदि आप सोचते हैं कि किसी समस्या को हल नहीं किया जा सकता तो चिंता करने से फायदा ही क्या है?
कुछ मूल-मंत्र :
  • हमारा  सफलता का ही  उद्देश्य होना चाहिये,दृढ संकल्प से किया हुआ कार्य अवश्य ही सफल होगा.
  • जीवन में कुछ बातें या घटनाएं संयोगवश हो सकती हैं। लेकिन आप अगर इस इंतजार में रहेंगे कि सब कुछ अपने आप अकस्मात ही आपको हासिल होगा, तो शायद आप सारी जिंदगी इंतजार ही करते रह जाएंगे, क्योंकि संयोग हमेशा तो नहीं हो सकता।
  • स्वयं की गलती को पहचाने,और इसे दूर करने का प्रयत्न करना चाहिये. दूसरों की गलती निकालना बहुत सरल है किन्तु स्वयं की गलती को स्वीकार करना अत्यन्त मुश्किल लगता  है।
  • गलतियाँ करना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है, गलतियाँ कष्ट देती है पर इसे सुधारने पर हम सफलता के नए द्वार पर होते है.
  • दूसरों की शिकायत करने वाला व्यक्ति हमेशा अशांत रहता है और कभी भी सफल नहीं हो पाता। सफलता और शांति पाने के लिये बेहतर है कि स्वयं को बदलें।
  • महान बनने की कोशिश न करें। ‘मुझे क्या मिलेगा या मेरा क्या होगा’, इसकी चिंता छोड़कर अगर अपने जीवन के लक्ष्य पर ध्यान देंगे और उसका दायरा बढ़ाएंगे, तो आप खुद एक असाधारण व्यक्ति बन जाएंगे।
  • साहसी बनें और किसी अवसर के खो जाने पर कभी भी आँसू न बहायें।अश्रु कायर बहाते हैं।सोचना है हम कायर नही है।
  • जीवन में परिवर्तन एक प्राकृतिक नियम है। अतः परिवर्तन को स्वीकार करें। परिवर्तन को स्वीकारने पर अन्य सभी बातें अपने आप ही परिवर्तित हो जायेंगी।
  • विकट परिस्थिति में भी ज्याद दुखी न होकर,विकट परिस्थिति के हटाने के बारे में सोचना चाहिये.हास्य के पात्र न बनें.
  • संभव की सीमाओं को जानने का एक ही तरीका है कि उन से थोड़ा आगे असंभव के दायरे में निकल जाइए।
  • हालांकि कोई भी व्यक्ति अतीत में जाकर नई शुरुआत नहीं कर सकता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति अभी शुरुआत कर सकता है और एक नया अंत प्राप्त कर सकता है।  
  • यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है तो आप हमेशा न जीतने का बहाना खोज लेंगे।
  • किसी के गुणों की प्रशंसा करने में, अपना समय मत बरबाद मत करो, उसके गुणों को अपनाने का प्रयास करो।
  • बंदरगाह में खड़ा जलयान सुरक्षित होता है जलयान वहां खड़े रहने के लिए नहीं बने होते हैं.
  • एक बार किसी कार्य को करने का लक्ष्य निर्धारित कर लेने के बाद, इसे हर कीमत तथा कठिनाई की लागत पर पूरा करें. किसी कठिन कार्य को करने से उत्पन्न आत्म विश्वास अभूतपूर्व होता है।
  • हम में से जीवन किसी के लिए भी सरल नहीं है. लेकिन इससे क्या? हम में अडिगता होनी चाहिए तथा इससे भी अधिक अपने में विश्वास होना चाहिए. हमें यह विश्वास होना चाहिए कि हम सभी में कुछ न कुछ विशेषता है तथा इसे अवश्य ही प्राप्त किया जाना चाहिए।
  • ग़लतियों से न सीखना ही एकमात्र ग़लती होती है।
  • यह कहना कठिन होता कि असंभव क्या है, क्योंकि विगत का स्वप्न, आज की आशा और कल की वास्तविकता होती है।
  • अधिकांश बड़े लक्ष्य हासिल न हो पाने का कारण यह हैं कि हम छोटी चाजों को पहले करने मे अपना समय बिता देते हैं।  
  • जब तक किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संभावनाओं से अधिक कार्य नहीं किया जाता है, तब तक उस व्यक्ति द्वारा वह सब कुछ नहीं किया जा सकेगा जो वह कर सकता है।
  • जीवन की त्रासदी इस बात में नहीं है कि आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचते हैं, त्रासदी तो इस बात की है कि आपके पास प्राप्त करने के लिए कोई लक्ष्य नहीं है।
  •  आपकी प्रतिभा, आपको भगवान का दिया गया उपहार है, आप इसके साथ क्या करते हैं, यह आपके द्वारा भगवान को दिया गया उपहार होता है।
रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय
नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय

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