सोमवार, 27 अप्रैल 2015

प्यार का आलम

प्यार का आलम भी क्या आलम होता है की आदमी उसमें डूबता है तो फिर डूबता ही चला जाता है। दोनों एक दूसरे पर सब कुछ निछावर करने के लिए ही गोया जिन्दा रहते हैं। उनका जिन मरना भी एक दूसरे के लिए होता है। प्यार का समर्पण आसमान की ऊचाइयों तक उठा देता है तो उसकी ठोकर गर्त में मिला देने के लिए काफी है

सोमवार, 26 जनवरी 2015

गणतंत्र दिवस हमारा है



बसंती परिधान में सजकर आया  
आज गणतंत्र दिवस हमारा है 
हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई 
सबको भाईचारे का पाठ पढता 
आज गणतंत्र दिवस हमारा है 
हम एक हैं एक रहेंगे का देता संदेश 
आज गणतंत्र दिवस हमारा है 
रखना है तिरंगे मान और अभिमान 
आज गणतंत्र दिवस हमारा है 
सत्य अहिंसा का पाठ  पढ़ाता 
आज गणतंत्र दिवस हमारा है