शनिवार, 28 मई 2016

"दूसरों से शिक्षा लें "

एक कहावत है की आगे वाला गिरे तो पीछे वाला होशियार हो जाये। जो बुद्धिमान होते हैं वे दूसरों के हालात देखकर शिक्षा ले लेते हैं। यदि हम भी चाहें और अपने ज्ञानचक्षु खुले रखें तो हम कदम-कदम दुसरो शिक्षा ले सकते हैं। दूसरों का परिणाम देखकर नसीहत ले सकते हैं क्योकि प्रत्येक शिक्षा खुद हीअनुभव करके ग्रहण की जाय यह जरा मुशिकल काम है। आग से हाथ जल जाता है यह हमने सुना है और जाना है तो अब खुद हाथ जला कर देखने की जरूरत नही। जिन बुरे कामों के बुरे परिणाम दूसरे भोग रहे हैं उन्हें देखकर उन कामों को न करने की शिक्षा ग्रहणकर लेना चाहिए। जो दूसरों को गिरता देख कर सम्भल जाते हैं वे व्यक्ति वाकई बुद्धिमान हैं।

रविवार, 6 मार्च 2016

"महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें"

"आप सभी दोस्तों को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ"

ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात
महाशिवरात्रि पर एक कथा इस प्रकार भी प्रचलित है। 
पुराणों में महाशिवरात्रि के बारे में कई कथाएँ हैं. उनमें से एक कथा के अनुसार एक बार विष्णु जी तथा ब्रह्मा जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद होने लगा. ब्रह्मा जी का मत था कि वह श्रेष्ठ हैं और विष्णु जी कहने लगे कि वह श्रेष्ठ हैं. ब्रह्मा जी तथा विष्णु जी के विवाद को सुनकर भगवान शिव एक लिंग के रुप में प्रकट हुए. यह शिवलिंग एक प्रकाश स्तम्भ के रुप में प्रकट हुआ था. ब्रह्माजी और विष्णु जी दोनों उस प्रकाश स्तम्भ के आदि तथा अंत की खोज में लग गए. लेकिन उन्हें प्रकाश स्तम्भ का आदि तथा अंत कुछ भी नहीं मिला.
ब्रह्मा जी ने इसके लिए झूठ का सहारा लेने की कोशिश की. उनकी इस हरकत से भगवान शिव क्रोधित हो गये और उन्होंने ब्रह्मा जी का पाँचवां सिर काट दिया. भगवान शिव के क्रोध को शांत करना कठिन कार्य था. इस पर विष्णु जी ने शिवजी का पूजन तथा उनकी आराधना की. बहुत दिन तक आराधना करने पर भगवान शिव विष्णु जी से प्रसन्न हुए. जिस दिन शिव प्रसन्न हुए उस दिन को महाशिवरात्रि के रुप में मनाया जाने लगा.
आप सभी की हर मनोकामनाएं देवो के देव भगवान शिव पूरी करें। 
"हर हर महादेव" 

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