खफा-ए -जिन्दगी को भुला कर के तो देखिए ,
ख्वाबो की दुनियाँ से निकल कर के तो देखिए ।
तेरी यादों के ही सहारे जी रहें हैं अब तलक,
दिल के झरोंखे में कोई दीप जला कर के देखिए।
हम समझ न पाए अब तक आपकी रुसवाई को,
नस्तरे दिल से अपना इल्जाम हटा के तो देखिए।
दस्ताने-ए-दिल को मेरी जुबां से सुना ही नही,
तिलिस्मे बेहिसी को कभी तोड़ के तो देखिए।
दर्दे-दिल को सहते हुए कितने सदियाँ गुजर गयी,
अपने माजी के मजार पर कभी आ कर के देखिए।
लगता अब उतर जायेंगे लहद में अहबाब के कांधों से,
रब के दर पर मेरे गुनाहों की सजा सुना कर तो देखिये।
अर्थ: तिलिस्मे =भवंर जाल, माजी=अतीत, मजार =कब्र, लहद=कब्र, अहबाब=मित्र जन
चलते चलते प्रस्तुत है:
करोगे याद गुजरे हसीन यादों को,
तरसोगे हमारे साथ एक पल बिताने को।
फिर आवाज दोगे हमें बुलाने को,
नहीं दरवाजा होगा स्वर्ग से वापस आने का।।


