यहाँ पति का घर, वहाँ पिता का घर,
उधर शायद पुत्र का घर,
पिता घर परायी पराये घर जाना है,
पति के घर परायी पराये घर से आयी है,
पुत्र के घर परायी .........शायद पुरानी है,
ऐसा जगह कहाँ जहाँ वो परायी नही ?
क्या परायी स्त्री हमेशा परायी रहेगी,
परायी स्त्री ही हमारी माँ,बहन और बेटी है,
बेटी को परायी कहना क्या तुम्हे स्वीकार है,
परायी बेटी के क्या है नसीब में,
क्या वह परायी ही रहेगी।
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