सोमवार, 27 अप्रैल 2015

प्यार का आलम

प्यार का आलम भी क्या आलम होता है की आदमी उसमें डूबता है तो फिर डूबता ही चला जाता है। दोनों एक दूसरे पर सब कुछ निछावर करने के लिए ही गोया जिन्दा रहते हैं। उनका जिन मरना भी एक दूसरे के लिए होता है। प्यार का समर्पण आसमान की ऊचाइयों तक उठा देता है तो उसकी ठोकर गर्त में मिला देने के लिए काफी है

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