गुरुवार, 10 जनवरी 2013

गुफ्तगु

आज का दिन  बड़ा ही  सुहाना  है, सोचा कुछ  शेर-औ-शायरी  ही हो जाय,सो पेश है चंद कतरे ............. 



               गुलशन में मंदपवन को तलाश तेरी है,
               बुलबुल की जुबां पर गुफ्तगु ....तेरी है।
               हर रंग में जलवा है तेरी कुदरत का ,
               जिस फूल को सूँघता हूँ खुशबु तेरी है।
     

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                     इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और,
              या इसमें रौशनी का करो इतजाम  और।
              आंधी में सिर्फ हम ही उखड़ कर नही गिरे,
              हमसे जुड़ा  हुआ था कोई नाम ..... और।
                                                

14 टिप्‍पणियां:

  1. एक तो मौसम मस्ताना है। उपर से आज जुमेरात का दिन है ,जो साथ ही जुमा की छुट्टी की खुश खबरी लिए हुए है। जुमा का स्वागत तो हमारे यहाँ दिल खोल कर किया जाता है।

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  2. बात तो आपने पते की कही आज का दिन का इंतजार तो हमेशा रहता है।

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  3. वाह! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति...

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  4. बहुत सुन्दर और बहुत अच्छी प्रस्तुती है

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  5. क्या बात है!!बहुत सुंदर !...मन को छू गयी रचना ...

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  6. गुलशन में मंदपवन को तलाश तेरी है,
    बुलबुल की जुबां पर गुफ्तगु ....तेरी है, वाह क्या बात है
    हर रंग में जलवा है तेरी कुदरत का ,
    जिस फूल को सूँघता हूँ खुशबु तेरी है.. वाह लाजवाब


    इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और,
    या इसमें रौशनी का करो इतजाम और। ... गज़ब की पंक्तियाँ
    आंधी में सिर्फ हम ही उखड़ कर नही गिरे,
    हमसे जुड़ा हुआ था कोई नाम ..... और। गहरी बात

    मित्रवर बहुत अलग लाजवाब और सुन्दर रचना हेतु ढेरों बधाइयाँ. सादर

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    1. बेहतरीन अंदाज में लिखे आपके शब्दों के लिए बहुत बहुत धन्यबाद।

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  7. लाजवाब और सुन्दर रचना ... ढेरों बधाइयाँ

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  8. इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और,बहुत ही सुंदर,आभार।

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  9. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुतीकरण.

    जवाब देंहटाएं

आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है,आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है, आपके कुछ शब्द रचनाकार के लिए अनमोल होते हैं,...आभार !!!