आज का दिन बड़ा ही सुहाना है, सोचा कुछ शेर-औ-शायरी ही हो जाय,सो पेश है चंद कतरे .............
गुलशन में मंदपवन को तलाश तेरी है,
बुलबुल की जुबां पर गुफ्तगु ....तेरी है।
हर रंग में जलवा है तेरी कुदरत का ,
जिस फूल को सूँघता हूँ खुशबु तेरी है।
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गुलशन में मंदपवन को तलाश तेरी है,
बुलबुल की जुबां पर गुफ्तगु ....तेरी है।
हर रंग में जलवा है तेरी कुदरत का ,
जिस फूल को सूँघता हूँ खुशबु तेरी है।
इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और,
या इसमें रौशनी का करो इतजाम और।
आंधी में सिर्फ हम ही उखड़ कर नही गिरे,
हमसे जुड़ा हुआ था कोई नाम ..... और।
एक तो मौसम मस्ताना है। उपर से आज जुमेरात का दिन है ,जो साथ ही जुमा की छुट्टी की खुश खबरी लिए हुए है। जुमा का स्वागत तो हमारे यहाँ दिल खोल कर किया जाता है।
जवाब देंहटाएंबात तो आपने पते की कही आज का दिन का इंतजार तो हमेशा रहता है।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा ! और ..प्यारा
जवाब देंहटाएंवाह! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति...
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंबहुत सुन्दर और बहुत अच्छी प्रस्तुती है
जवाब देंहटाएंक्या बात है!!बहुत सुंदर !...मन को छू गयी रचना ...
जवाब देंहटाएंगुलशन में मंदपवन को तलाश तेरी है,
जवाब देंहटाएंबुलबुल की जुबां पर गुफ्तगु ....तेरी है, वाह क्या बात है
हर रंग में जलवा है तेरी कुदरत का ,
जिस फूल को सूँघता हूँ खुशबु तेरी है.. वाह लाजवाब
इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और,
या इसमें रौशनी का करो इतजाम और। ... गज़ब की पंक्तियाँ
आंधी में सिर्फ हम ही उखड़ कर नही गिरे,
हमसे जुड़ा हुआ था कोई नाम ..... और। गहरी बात
मित्रवर बहुत अलग लाजवाब और सुन्दर रचना हेतु ढेरों बधाइयाँ. सादर
बेहतरीन अंदाज में लिखे आपके शब्दों के लिए बहुत बहुत धन्यबाद।
हटाएंक्या बात है,अतिसुन्दर।
जवाब देंहटाएंलाजवाब और सुन्दर रचना ... ढेरों बधाइयाँ
जवाब देंहटाएंइस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और,बहुत ही सुंदर,आभार।
जवाब देंहटाएंआपका शुक्रिया।
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुतीकरण.
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