माँ,
आज आ रही है
तुम्हारी यादें बहुत
तन्हा छोड़ मुझे
जल्दी चली गयी तू
हर पल रखा
मेरी ही खुशियों का ख्याल
कभी भी न आने दी आँखों में नमी
अब हर पल रहती
तेरी यादों में आँखें नम
तुम्हारी लोरियों की गूंज
अब भी गूंज रही कानो में
नहीं कर पा रहा समझौता
वीराने जिन्दगी से
आदत जो रही
तुम्हारी प्यार दुलार का
दुलार भरा हाथों का स्पर्श
महसूस करता स्वप्निल नींद में
फूलों जैसे गोद में मचलना
तुम्हारा मुस्कराना
नींद से जग जाता अचानक
ढूढने लगता तुम्हार चेहरा
चमकते चाँद सितारों में
माँ,तुम याद आ रही हो बहुत।
अतिसुन्दर ,प्रस्तुति , आपनी बेटे आत्मा को जागा दिया और माँ की यादें को ताजा कर दी बहुत - बहुत धन्याबाद
जवाब देंहटाएंमाँ का आँचल और नेह और कहीं नहीं है .
जवाब देंहटाएंमाँ की यादें कभी भूल ही नही सकते,सुन्दर प्रस्तुती।
जवाब देंहटाएंमाँ का स्थान कोई नही ले सकता। बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण।
जवाब देंहटाएंमाँ का दुलार भूल ही कब सकते है ,अति सुन्दर।
जवाब देंहटाएंमाँ की यादें पर बहुत ही सुन्दर कविता !!!
जवाब देंहटाएंma ye shabd hi kafi hai bhavon ko jagane ke liye.
जवाब देंहटाएंsunder rachna
shubhkamnayen
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जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (02-03-2013) के चर्चा मंच 1172 पर भी होगी. सूचनार्थ
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना!
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना!
जवाब देंहटाएंमाँ सबसे प्रिय शब्द-
जवाब देंहटाएंआभार आदरणीय-
भावपूर्ण-
आनंद दायक -
सादर
तुम्हारी प्यार दुलार का
जवाब देंहटाएंदुलार भरा हाथों का स्पर्श
महसूस करता स्वप्निल नींद में
फूलों जैसे गोद में मचलना
तुम्हारा मुस्कराना ,,,,,
बहुत ही सुंदर रचना ,,,,,बधाई
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माँ सदा ही याद आयेंगीं..... मर्मस्पर्शी भाव
जवाब देंहटाएंमाँ शब्द ही ऐसा है की बस मुह से निकले तो भी दिल में एक अजब सी ख़ुशी मिलती है ...
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया रचना ...
आहा ..हृदयस्पर्शी शब्द.
जवाब देंहटाएंभावभीनी श्रद्धांजलि !
जवाब देंहटाएंआप सब का सादर अभिनन्दन.
जवाब देंहटाएंमाँ का कोई भी प्रसंग पण को छू जाता है ... उतर जाता है अंतस में ...
जवाब देंहटाएंदिल से निकले शब्द भावनाओं का सैलाब ले आते हैं ...
जवाब देंहटाएंसुन्दर शब्दों में माँ का मधुर्स्मृति वर्णन -हृदयस्पर्शी
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