सोमवार, 13 जनवरी 2014

"आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है"


कल ही रात को मुझे एक जानकार के आत्महत्या का समाचार मिला,मन मर्माहत हुआ।  आये दिन हमलोग आत्महत्या कि बढ़ती घटनाओं को सुनते ही रहते है,क्या आत्महत्या किसी समस्या का उचित समाधान है? आत्महत्या करने वालों कि  समस्याएं पर नजर डालें तो इनमे पारिवारिक कलह,दिमागी बीमारी,परीक्षा में असफलता,प्रेम-प्रसंग से आहत ऐसे कई कारण आते हैं।
आत्महत्या का अर्थ जान बूझकर किया गया आत्मघात होता है। वर्तमान युग में यह एक गर्हणीय कार्य समझा जाता है, परंतु प्राचीन काल में ऐसा नहीं था; बल्कि यह निंदनीय की अपेक्षा सम्मान्य कार्य समझा जाता था। हमारे देश की सतीप्रथा तथा युद्धकालीन जौहर इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मोक्ष आदि धार्मिक भावनाओं से प्रेरित होकर भी लोग आत्महत्या करते थे।
आत्महत्या के लिए अनेक उपायों का प्रयोग किया जाता है जिनमें मुख्य ए हैं: फांसी लगाना, डूबना, गला काट डालना, तेजाब आदि द्रव्यों का प्रयोग, विषपान तथा गोली मार लेना। उपाय का प्रयोग व्यक्ति की निजी स्थिति तथा साधन की सुलभता के अनुसार किया जाता है।
                   कारण कुछ भी हो,आत्महत्या किसी भी तरीके से उचित नही माना  जा सकता।यद्धपि आम तौर पर से आत्महत्या करना कायरता पूर्ण काम माना  जाता है,पर कुछ लोगो कि नजर में आत्महत्या करना बहादुरी का भी काम है,लेकिन मैं कहना चाहूँगा यह बहादुरी वैसी नहीं है जैसी कारगिल के मोर्चे पर हमारे देश के वीर सैनिकों ने प्रदर्शित की। बहादुरी वह होती है जो एक सैनिक या सेनापति की विशेषता होती है और बहादुरी डाकू सरदार कि भी होती है वर्ना वह  डाकू दल का सरदार बन ही नहीं सकता था। फर्क इतना ही होता है कि सैनिक बहादुरी का सही उपयोग करता है और डाकू सरदार बहादुरी का दुरूपयोग करता है,साथ ही कायर भी होता है वरना जंगलों में छिपते फिरने कि क्या जरूरत ? ऐसे ही आत्महत्या करने वाला एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह कायर भी होता है और बहादुर भी।

             आत्महत्या करने का कारण जो भी हो पर हर सूरत में आत्महत्या करना गलत काम है। आत्महत्या करने मरने से कर्मगति पीछा थोड़े ही छोड़ देगी बल्कि जीवन को ठुकराने और आत्महत्या करने का एक पाप और बढ़ जाएगा। मर जेन से कुछ हासिल नही होता। जरा यह भी सोचना चाहिए कि "आब तो घबड़ा के ये कहते हैं कि मर जायेंगे,और मर क्र भी चैन न पाया तो किधर जायेंगे।" कैसी भी समस्या हो,विवेक,धैर्य और साहस से काम लेने कि जरूरत होती है। अगर इन तीनों मित्रों का साथ न छोड़ा जाए तो कैसा भी संकट हो अंत में हम विजयी हो ही  जायेंगे। समस्या का समाधान कर ही लेंगे। यह भी यद् रखें ईश्वर भी उन्हीं कि मदद करता है जो अपनी मदद आप खुद करते हैं।

आप भी इस समस्या पर अपने विचार प्रकट करें!     
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16 टिप्‍पणियां:

  1. आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नही है यह एक कायरता पूर्ण कार्य है,बहुत ही प्रेरक आलेख।

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  2. आत्महत्या को किसी भी मायने में उचित नही कहा जा सकता,बहुत ही बेहतरीन आलेख धन्यबाद आपका।

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  3. जो चला गया उसको दोषी ठहराना ठीक नहीं है। ये आतं‍कवादियों से तो अच्‍छे इंसान होते हैं। अपना ही नुकसान करते हैं दूसरे का नहीं।

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  4. बीमारी सी फैलती, शुद्ध पलायनवाद |
    कायर हुई बहादुरी, बढ़ी आज तादाद |
    बढ़ी आज तादाद, आत्महंता क्या पाये |
    छोड़ समस्या भाग, कई अपने तड़पाये |
    बीते आपद्काल, समस्याएं संसारी |
    रखिये हिम्मत धैर्य, दूर करिये बीमारी ||

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  6. विचारोत्तेजक आलेख.सचमुच आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है.जीवन की कठिनाईयों,दुश्वारियों से हार जाने वाले ही ऐसा कदम उठाते है.
    आत्महत्या के सन्दर्भ में फ्रांसीसी समाजशास्त्री इमाइल दुर्खीम ने गहन अध्ययन कर एक किताब लिखी है "Le Suicide".
    इसमें उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों के साथ व्यक्ति के मानसिक आघात सहने की क्षमता को भी जिम्मेवार माना है.

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  7. आत्महत्या करना किसी समस्या का समाधान नही है ! हताशा में किया गया कायरता पूर्ण कार्य है,

    RECENT POST -: कुसुम-काय कामिनी दृगों में,

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  8. काफी उम्दा प्रस्तुति.....
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (14-01-2014) को "मकर संक्रांति...मंगलवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1492" पर भी रहेगी...!!!
    - मिश्रा राहुल

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  9. सही सोच !
    मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट हम तुम.....,पानी का बूंद !
    नई पोस्ट बोलती तस्वीरें !

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  10. आपकी बात से सहमत हूँ ... आत्म्हत्य किसी भी समस्या का समाधान नहीं है ...
    आगे बढ़ के हिम्मत से काम लेना ही समस्या का समाधान खोजने में सहायक है ...

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  11. बहुत सारगर्भित और विचारोत्तेजक आलेख...

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  12. समस्या सेभाग कर जान देना आत्म हत्या है जो सर्वथा अनुचित है और कायरता पूर्ण भी। पर जीवित कार्य पूर्ण हो जाने की सोच कर जो शरीर त्याग होता है उसे समाधि कहते हैं जैसे हमारे कई संतों ने किया।

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  13. सामान्य मानसिक अवस्था में कोई भी आत्महत्या नहीं करता है, कुछ ऐसी परिस्थिति आती होगी जब ज़िन्दगी मौत से कठिन लगती होगी. इस जन्म की समस्याओं से घबरा कर आत्महत्या कर लिया और मरने के बाद इससे भी बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़े तो ... बेहतर है समस्याओं का सामना डट कर करना चाहिए और बहुत कुछ वक़्त पर छोड़ देना चाहिए.

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  14. बहुत ही बेहतरीन संदेश,आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नही होता।

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  15. सच आत्महत्या समस्या का समाधान नही है ...
    प्रेरक प्रस्तुति।

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  16. Bahut gyanwardhak lekh chitta Ko santulan me rakhne ki prerna milti hai, abhar kumar sb

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आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है,आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है, आपके कुछ शब्द रचनाकार के लिए अनमोल होते हैं,...आभार !!!