मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

निदा फाजली: भावपूर्ण श्रद्धांजलि!

मशहूर शायर और फिल्म गीतकार निदा फाजली का 78 वर्ष की उम्र में सोमवार को मुंबई के वर्सोवा स्थित घर पर निधन हो गया। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। सोमवार दोपहर को हार्ट अटैक से उनकी सांसे थम गईं। निदा फाजली साहित्य अकादमी, पद्म श्री सम्मान से सम्मानित थे।निदा फाजली का जन्म 1938 में दिल्ली के कश्मीरी परिवार में हुआ था। उनका बचपन और जवानी ग्वालियर में बीता। यहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। 1957 में ग्वालियर कॉलेज से ग्रैजुएट हुए फाजली ने छोटी उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। वर्ष 2013 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से और सांप्रदायिक सद्भाव पर लेखन के लिए उन्हें ‘राष्ट्रीय सद्भाव पुरस्कार’ से भी नवाजा गया था।
      निदा फाजली (फाइल फोटो)
भावपूर्ण श्रद्धांजलि!


दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है

अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है

आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है

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6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (10-02-2016) को ''चाँद झील में'' (चर्चा अंक-2248)) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    चर्चा मंच परिवार की ओर से स्व-निदा फाजली और स्व. अविनाश वाचस्पति को भावभीनी श्रद्धांजलि।

    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. स्व0 निदा फाजली को श्रद्धांजलि।

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  3. स्व0 निदा फाजली को श्रद्धांजलि।

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  4. स्व० निदा फाजली जी को श्रद्धांजलि।������������������

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  5. निदा फाज़ली जी को विनम्र श्रद्धांजलि...

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  6. निदा फाज़ली साहब पर बेजोड़ लेख की प्रस्तुति। निदा फाजली साहब तो रोते हुए बच्चों को हंसाने में विश्वास करते थे। हम सबको उनकी कमी बहुत खलेगी।

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