मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

माँ सरस्वती पूजा



या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥



जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती हमारी रक्षा करें॥1॥

शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अँधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान्‌ बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूँ॥2॥
आप सभी को माँ सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनायें। 

मंगलवार, 28 जनवरी 2014

सर्दी के दिन:हाइकू


१. 
सर्दी के दिन
ठिठुरते इंसान
लाया कहर 

शीत लहर 
पिया हैं परदेश 
व्याकुल मन 
३. 
सर्द हवाएं 
बेदर्द हुई सर्दी 
आफत आई 

४. 
कापते हाथ 
ठिठुरता बदन 
ओढ  रजाई 
५. 
कंपाती  भोर 
रजाई में दुबके 
सिकुड़े हुए 

६. 
छिपा सूरज 
कुहरे की चादर 
धुंध ही धुंध 
७. 
सर्दी की रात 
काटे नही कटती 
खून जमाती 

८. 
जाड़े की धूप  
गुनगुनाती तपिस 
सुहाना  लगे 
९. 
सर्द मौसम 
अस्त व्यस्त जीवन 
अलाव प्यारा 
१०. 
लाया शिशिर 
सर्दी की  मीठी धूप 
गुलाबी ठंढ 
११. 
सर्द है रात 
वसेरा फुटपाथ 
दीन अनाथ 
१२. 
ओस की बूँदें 
मोतियों से चमके 
मनभावन