रविवार, 10 मार्च 2013

कामयाबी की मंजिलें



 

हर तरफ छाया है अँधेरा
दिखता नही सवेरा
जिन्दगी में है बेरुखी का आलम
हर डाल के पत्ते है सुर्ख
खो गया है मंजिलों के रास्ते
नहीं रहा अब खुशियों से वास्ता
जिन्दगी के इम्तिहाँ
तोड़ रहें मेरा हौसला
रुकने के कगार पर
जिन्दगी के कामयाबी के कारवाँ
मेरे जज्बात उड़ रहें
बिपरीत हवाओं के साथ
जिन्दगी की तन्हाई लग रही
तूफान के बाद छाये सन्नाटे की तरह
खुशी के नगमे भी लगते
दर्द भरी शायरी की तरह
जिन्दगी के उलझे हैं सारे तार
मकड़ी की जालों की तरह
अब तो दोस्तों की सलाहियत भी
लगते रेगिस्तानी काँटों की तरह
पर,
जिन्दगी टूट कर बिखरने से पहले
सोये आत्मविश्वास में
हुआ एक उजाला सबेरा
लगता अब तोड़ पाउँगा
उलझनों का तिलस्म
जीवन है संघर्ष 
लड़कर ही इसे पाना है
अब दूर नहीं रही
मेरी कामयाबी की मंजिलें. 
 

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