माँ ,माँ,ओ मेरी माँ तुम सुन रही हो मुझे मैं तो अभी तेरी कोख में हूँ जानती हूँ एहसास है तुझे आज मैंने सुना पापा की बातें उन्हें बेटी नही बेटा चाहिए मैं बेटी हूँ,इसमें मेरा क्या दोष मईया मैं तो तेरा ही अंश तेरे ही जिगर का टुकड़ा तेरे ही दिल की धडकन क्या तुम भी मुझे मरना चाहती हो मुझे मत मरो माँ मुझे जग में आने दो न मैं तेरी बगिया की कली तेरा जीवन महका दूँगीं तेरे सपने सच कर दूँगी जीवन के हर पग पर तेरा साथ न छोडूंगी तेरा दुःख मेरा दुःख होगा माँ समझाना पापा को मैं पापा पर न बनूँगी बोझ पढ़ लिख कर छूऊँगी जीवन के उच्च शिखर को एक दिन करेंगे फक्र मुझपर बनूँगी लक्ष्मी घर की तेरी माँ ओ मेरी प्यारी माँ अजन्मी बेटी तुझे पुकार रही मत करना मुझे मशीनों के हवाले मत मारना मुझे। एक प्रयास,"बेटियां बचाने का"....... |
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भूली बिसरी यादें पर आप हिन्दी ग़ज़लें , कविताएँ, हाइकु, बोध कथायें और उच्च कोटि के अनमोल वचन पढ़ने को मिलेगा।
शनिवार, 2 फ़रवरी 2013
मत मारो माँ
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बहुत ही ह्दय को छुने वाली ममतामयी लाईने है ।आपनी बात रखने मे पुरी तरह सफल हुए है ।
जवाब देंहटाएंधन्यबाद.
हटाएंधन्यबाद महोदय,सादर आभार।
जवाब देंहटाएंबेहद मर्मस्पर्शी रचना !
जवाब देंहटाएंधन्यबाद
हटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति | बधाई |
जवाब देंहटाएंTamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page
सुन्दर प्रस्तुति | बधाई | राजेन्द्र जी,,!
जवाब देंहटाएंबेटी बोझ नही बरदान बनेगी
बेटी बेटा बनकर अहसान करेगी
बेटियाँ,बेटो,से किसी तरह कमतर नहीं,
कल्पना चावला बनकर भारत का नाम करेगी,,,,,,
RECENT POST शहीदों की याद में,
बेहद मर्मस्पर्शी रचना...
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसमाज की असल तस्वीर
बहुत सुन्दर प्रस्तुति आपने दि है सर इस के लिये बहुत सारा धन्बाद
जवाब देंहटाएंVery good post,Thanks.
जवाब देंहटाएंआज की ज्वलंत समस्या पर बेहतरीन प्रस्तुती।
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना....
जवाब देंहटाएंसादर
अनु
बेटी नही होती हम कहाँ से होते,बेटी नहीं तो बहु कहाँ से होगी।बहुत ही सार्थक विचार है।
जवाब देंहटाएंदिल को छूती हुई रचना ... सच है की बेटी का क्या कसूर ...
जवाब देंहटाएंबेटी दरअसल रिश्तों की मजबूत डोर होती है जो समझने वाली बात है ...
आपका बहुत बहुत आभार।
हटाएंकाश हर मत पिता को यह बात समझ में आ जाए
जवाब देंहटाएंकि बेटी, बेटे से कहीं कम नहीं है बल्कि उससे कहीं बढ़कर ही है
सुन्दर रचना
सादर !
भूर्ण हत्या रोकने पर बहुत ही सार्थक कविता।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा मैने भी एक ऐँसी कविता लिखी हैँ मासुम कली उमँगेँ और तरंगे ...
जवाब देंहटाएंइसे भी जरुर पढे और इस ब्लाँग पर आयेँ आपका स्वागत हैँ ।
gustandwaves.blogspot.com/2012/10/blog-post_26.htmlमासुम कली
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना,मन भावाकुल हो रहा है।
जवाब देंहटाएंभ्रूण हत्या से घिनौना ,
जवाब देंहटाएंपाप क्या कर पाओगे !
नन्ही बच्ची क़त्ल करके ,
ऐश क्या ले पाओगे !
जब हंसोगे, कान में गूंजेंगी,उसकी सिसकियाँ !
एक गुडिया मार कहते हो कि, हम इंसान हैं !