मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

"क्या हो गए हैं यारों"




हम क्या थे अब क्या हो गए हैं यारों,
भूल अपनी मर्यादा बेपर्दा हो गए यारों।

चारो तरफ है फैला जुर्म का काला साया,
               अब साये से भी डर लगने लगा है यारों।

 
   रौशनी की फ़िक्र करता नही है अब कोई, 
हर तरफ तूफां का आलम सा है यारों।
 
लूट-खसोट,अत्याचार का है बाजार गर्म,
दरवाजे तो है बंद जाएँ तो किधर यारों।
 
उठ रहा हर तरफ बेबसी का धुंआ ही धुआं,
अब तो साँस लेना भी हो गया दूभर यारों।
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तन पर न हो कपड़ा पावों से ढक लेंगे लाज को,
पर पावों को भी खिचने वाले हैं बहुत यारों।
 
रोज ही नए नए मंजर सामने आने लगे है,
हँसते हँसते ही लोग चिल्लाने लगे हैं यारों। 
 
देख दुर्दशा देश की बहुत दूर निकल आयें,
सात समन्दर पार  भी न चैन आया यारों।
 
                                                                                                                                                        

12 12

चलते चलते ..........
                           अब तो घबड़ा के यह कहते है कि मर जायेंगे,
                           मर कर  भी  चैन न पाया तो किधर  जायेंगे।

28 टिप्‍पणियां:

  1. यारो चारो ओर हैं, भरे चोर मक्कार |
    रहना इनके बीच है, ये ही तो सरकार |
    ये ही तो सरकार, *सपदि सरकस सर काटे |
    सिंह-शावकों बीच, नीच टुकड़े कर बाँटे |
    सात समंदर पार, वहाँ भी मारो मारो |
    बसते रिश्तेदार, प्यार से कटिए यारो ||
    *तुरंत

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  2. समाज मे हो रही असामाजिक घटनाओ का सजीव वर्नन है ।आप अपनी मन की व्यथा को रखने मे कामयाब हुए है।

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  3. लूट-खसोट,अत्याचार का है बाजार गर्म,
    दरवाजे तो है बंद जाएँ तो किधर यारों।,,,,,बहुत उम्दा गजल,सराहनीय प्रयास,बधाई

    RECENT POST बदनसीबी,

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  4. आज के बिगड़ते हालात पर सुंदर ग़ज़ल।

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  5. पावों को खीचने वालों से ही परेशान है समाज,अतिसुन्दर।

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  6. बहुत ही सुंदर अव सार्थक ग़ज़ल ,अतिसुन्दर।

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  7. सुन्दर रचना
    शब्द विहीन कर दिया
    सादर
    यशोदा
    पधारें
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/
    http://yashoda4.blogspot.in/
    http://4yashoda.blogspot.in/
    http://yashoda04.blogspot.in/

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  8. मन की चिंता वाज़िब है आपकी .....
    शुभकामनायें!

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है, आपने ग़ज़ल के रूप में दरशाया है , और पुरे दुनियाँ को बताया है , बहुत - बहुत धन्यबाद

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  10. Aaj ke haaloto par khoobsurat Rachna...
    http://ehsaasmere.blogspot.in/2013/02/blog-post.html

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  11. बहुत अच्छा आप लिखतेँ हैँ यारोँ
    शालिन कथन पढ , चैन मिलता इससे ज्यादा क्या कहे यारोँ ।

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    उत्तर
    1. धन्यबाद के अलावा अब क्या कह सकता हूँ यारों।

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  12. बार बार पढने को दिल करता है आपकी ग़ज़ल।

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  13. देख दुर्दशा देश की बहुत दूर निकल आयें,
    सात समन्दर पार भी न चैन आया यारों।........ बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना!

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  14. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है,आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है, आपके कुछ शब्द रचनाकार के लिए अनमोल होते हैं,...आभार !!!