शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

तू कैसा बेटा है


आज आपलोगों के सामने माँ और कलयुगी बेटे की तुलना करते हुए एक कविता शेयर कर रहा हूँ ...


 
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20 टिप्‍पणियां:

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  2. पेड़ कितना भी पुराना हो ,आँगन में लगे रहने दो,
    फल-फूल न सही,छाया तो देगा,,,,भावपूर्ण पंक्तियाँ,,,


    Recent post: गरीबी रेखा की खोज

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  3. कल २४/०२/२०१३ को आपकी यह पोस्ट Bulletin of Blog पर लिंक की गयी हैं | आपके सुझावों का स्वागत है | धन्यवाद!

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  4. bilkul sahi.....par jab tak samjhte hain...der ho jati hai...

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  5. rajendra ji aapke kaam ko sadhu vaad
    really you doing amazing
    keep it up

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  6. सुन्दर रचना राजेंद्र जी. ब्लॉग कलश पर संकलन का आपका प्रयास बहुत अच्छा लगा.

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  7. सही है जनाब आजकल के बहुत से बच्चे अपने माँ बाप के प्रति लापरवाह नजर आते है।

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  9. सही है माँ बाप तो हमेशा शीतल छाया ही तो देते हैं।

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  10. कुमारी दीप्ती24 फ़रवरी 2013 को 7:16 am

    बहुत ही भावपूर्ण मार्मिक प्रस्तुति.

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  11. बेटा हो श्रवण कुमार जैसा हो,नहीं तो बेटी ही सही.

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  12. माँ के किये उपकार सभी नही चुका रहें है,बहुत ही भावपूर्ण कविता.

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  13. बहुत उम्दा पंक्तियाँ ..... वहा बहुत खूब
    मेरी नई रचना
    खुशबू
    प्रेमविरह

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  14. माँ का कर्ज चुकाने का जी जान से प्रयास करना चाहिए,बहुत ही सुन्दर कविता.

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  15. बहुत ही भावात्मक कविता हमे हर हाल में माँ-बाप का ख्याल रखना चाहये,धन्य है आप की लेखनी.

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  16. बहुत ही सुन्दर कविता पंक्तियाँ

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  17. बहुत ही सुंदर कविता , अंत की लाइनो ने भाव विहल कर दिया

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  18. बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ

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आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है,आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है, आपके कुछ शब्द रचनाकार के लिए अनमोल होते हैं,...आभार !!!