बुधवार, 25 सितंबर 2013

आपका साथ


जिस दिन से 
तुम आई मेरी जिंदगी मे 
जीवन के प्रत्येक दिन 
मानो दिवाली है. 
तुम से दूर रहकर 
नही कर सकता कल्पना 
हर पल महसुस करता 
अंतरात्मा की आवाज 
जिस में हम एक साथ 
कर रहें हैं वीणा का वादन 
साथ बिताये हसींन लम्हे 
हरपल आँखों के सामने 
मानों चल रहा है चलचित्र 
अपनी आँखों के सपने 
पाता हूँ तुम्हारी आँखों में 
जीवन का अपना हर धागा 
है सुलझा हुआ 
दिल की आत्मीयता दिव्य बन जाता है.
आपकी बाँहों का सहारा 
मुझे लगता है मुझे मिल गया है 
पूरी दुनिया के आकर्षण 
हमारा प्यार एक मंदिर की तरह 
जीवन के हर उतार चढाव में 
मिला हमेशा तुम्हारा साथ 
धन्य है उस इश्वर का 
जो भेजा तुम्हे हमारी 
जिन्दगी में।

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शनिवार, 14 सितंबर 2013

हैरानी से डरते हैं



अजब हैं लोग थोड़ी सी परेशानी से डरते हैं
कभी सूखे से डरते हैं, कभी पानी से डरते हैं

तब उल्टी बात का मतलब समझने वाले होते थे
समय बदला, कबीर अब अपनी ही बानी डरते हैं

पुराने वक़्त में सुलतान ख़ुद हैरान करते थे
नये सुलतान हम लोगों की हैरानी से डरते हैं

हमारे दौर में शैतान हम से हार जाता था
मगर इस दौर के बच्चे तो शैतानी से डरते हैं

तमंचा ,अपहरण, बदनामियाँ, मौसम, ख़बर, कालिख़
बहादुर लोग भी अब कितनी आसानी से डरते हैं

न जाने कब से जन्नत के मज़े बतला रहा हूँ मैं
मगर कम-अक़्ल बकरे हैं कि कुर्बानी से डरते हैं
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ये रातों-रात कुछ का फूलना, फलना, चमक जाना
हमें बतलाओ इस करतब में क्या तकनीक होती है
                                                                                                                                      आभार: सर्वत एम् ज़माल