मंगलवार, 15 जनवरी 2013

हकीकत




        मेरे दिल के समन्दर में कभी उतर कर देखा होता,
        कभी  प्यार के  दो  बोल  बोलकर ही देखा.....होता.
                                 मेरी वफाओं को मेरी नजर से देखा ही नही,
                                 तुम कभी मुझ से दूर जाकर ही सोचा होता.
        इश्क व मोहब्बत का सागर है ...अथाह,
        कभी तुम इसमें उतर क़र ही देखा होता.
                                 प्यार का मतलब जानने से कुछ पहले,
                                 मेरे साथ दो कदम चल के ही देखा होता.
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        मेरे गम को अब तुम क्या महसूस  करोगे,
        मेरे दिल की बगिया में आ क़र ही देखा होता.
                                क्या पता था हम सिर्फ मजाक ही है उनके लिए,
                                मीठी जुबा से हकीकत ही बयाँ क़र दिया.. होता.

           

                                           

19 टिप्‍पणियां:

  1. क्या पता था हम सिर्फ मजाक ही है उनके लिए,
    मीठी जुबा से हकीकत ही बयाँ क़र दिया.. होता

    अंतिम पंक्तियाँ थोड़ी तल्ख़ मगर काफी अच्छी :-)
    सुन्दर भावाभियक्ति !
    साभार !

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  2. बहुत सुन्‍दर प्रस्‍तुति जनाब

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  3. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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  4. वाह राजेंद्र जी अच्छी रच प्रभावशाली भी

    जवाब देंहटाएं
  5. राजेंद्र जी शुक्रिया! काश ! मैं आपके ब्लॉग पर पहले आ पाता!!! बहुत खुबसूरत गजल .

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. बहुत सुन्‍दर प्रस्‍तुति.

    अपना हमसफ़र जाना ,इबादत भी करी जिनकी
    चलतें दो कदम संग में ,सहारे भी दिए होते

    जीने का नजरिया फिर अपना कुछ अलग होता
    गर अपनी जिंदगी के गम ,सारे दे दिए होते

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  8. बहुत सुन्दर प्रसतुति लगी भइया धन है आपकि बिचार

    जवाब देंहटाएं
  9. आभार आपकी सद्य टिपण्णी का :

    मेरे दिल के समन्दर में कभी उतर कर देखा होता,
    कभी प्यार के दो बोल बोलकर ही देखा.....होता.
    मेरी वफाओं को मेरी नजर से देखा ही नही,(नहीं ).....
    तुम कभी मुझ से दूर जाकर ही सोचा होता.
    इश्क व मोहब्बत का सागर है ...अथाह,
    कभी तुम इसमें उतर क़र ही देखा होता.
    प्यार का मतलब जानने से कुछ पहले,
    मेरे साथ दो कदम चल के ही देखा होता.
    मेरे गम को अब तुम क्या महसूस करोगे,
    मेरे दिल की बगिया में आ क़र ही देखा होता.
    क्या पता था हम सिर्फ मजाक ही है (हैं )उनके लिए,
    मीठी जुबा (ज़ुबां )से हकीकत ही बयाँ क़र दिया.. होता.

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति हुई है अर्थ और विचार की रचना में .

    जवाब देंहटाएं

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