जो कर रही थी इंतजार
पल पल क्षण क्षण
अपने खिल जाने का
अपने मुस्कराने का
अपनी खुशबु सिमटने का
आखिर वह दिन आ ही गया
कली अधखिली और
आगे खिलने लगी
मंद मंद पवन के साथ
झूम कर खिलखिलाने लगी
फैला खुशबु उपवन में
भौरे करने लगे गुंजन
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कोयल भी प्रेमगीत गाने लगी।
कोयल भी प्रेमगीत गाने लगी।
"अक्स खुशबु हूँ बिखरने से न रोके कोई
और बिखर जाऊं तो मुझको न समेटे कोई"
(आभार )
और बिखर जाऊं तो मुझको न समेटे कोई"
(आभार )
अति सुन्दर बस इस कली को आँधियो से बचाकर रखना पङेगा ताकि वह पुर्न रूप से अपनी खुशबू बिखेर सके ।
जवाब देंहटाएं...ब्हुत सुन्दर द्रश्य,शब्दों के माध्यम से चित्रित किया है आपने...बधाई!
जवाब देंहटाएंसुन्दर प्रस्तुति .
जवाब देंहटाएंसुन्दर शब्द चयन और उम्दा प्रस्तुति |
जवाब देंहटाएंआशा
Bahut hi sundar prstutikaran,abhar hai aapka.
जवाब देंहटाएंक्या बात है,बहुत ही सुन्दर कविता.
जवाब देंहटाएंबहुत प्यारी सुन्दर कविता।
जवाब देंहटाएंफूल की सुन्दर प्रस्तुति,अतिसुन्दर।
जवाब देंहटाएंअतिउत्तम,उत्कृष्ट रचना।
जवाब देंहटाएंबहुत ही मनोहर कविता,अतिसुन्दर।
जवाब देंहटाएंBest of best poetry,Thanks a lot.
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुखद भाव लिए सुन्दर कविता,अतिसुन्दर।
जवाब देंहटाएंबेहद ही सुन्दर कविता,लाजबाब।
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जवाब देंहटाएंशुक्रिया आपकी टिपण्णी का
सुन्दर रचना है आपकी चित्र भी .
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगल वार 19/2/13 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका हार्दिक स्वागत है
जवाब देंहटाएंसच है खुशियां रुके नहीं रूकती ... खुशबू अपनी जगह अपने आप ही बना लेती है ...
जवाब देंहटाएंसुन्दर रचना ...
kali ke khilne ki aapko bhi badhai ,sunder rachna
जवाब देंहटाएंगुज़ारिश : !!..'बचपन सुरक्षा' एवं 'नारी उत्थान' ..!!
kali ko to kilana hai or kila ke murjana hai yehi phoolo ka raj hai
जवाब देंहटाएंथैंक्स
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