मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था.
गति मिली, मैं चल पड़ा,
पथ पर कहीं रुकना मना था
राह अनदेखी, अजाना देश,
संगी अनसुना था.
चाँद सूरज की तरह चलता,
न जाना रात दिन है
किस तरह हम-तुम गए मिल,
आज भी कहना कठिन है.
तन न आया माँगने अभिसार
मन ही जुड़ गया था
मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था.
देख मेरे पंख चल, गतिमय
लता भी लहलहाई
पत्र आँचल में छुपाये
मुख-कली भी मुस्कुराई
एक क्षण को थम गए डैने
समझ विश्राम का पल
पर प्रबल संघर्ष बनकर
आगई आंधी सदल-बल
डाल झूमी, पर न टूटी
किंतु पंछी उड़ गया था
मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था.
************************
ध्यान तक विश्राम का पथ पर महान अनर्थ होगा,
ऋण न युग का दे सका तो जन्म लेना व्यर्थ होगा।
सादर आभार:शिवमंगल सिंह
उत्कृष्ट भाव ....
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर.
जवाब देंहटाएंबेहतरीन बहुत ही सुंदर भावपूर्णरचना... !!
जवाब देंहटाएंआपने लिखा....
जवाब देंहटाएंहमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए शनिवार 11/05/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है .
धन्यवाद!
अतीव सुन्दर कृति स्व. शिवमंगल सिंह का प्रभाव भी पद्धिति में साफ दृष्टिगोचर होता है ...वल्कि उनसे भी कहीं उन्नल ऊर्जा प्रवाह के लिये लिये साधुवाद rajendr prasad ji
जवाब देंहटाएंअतीव सुन्दर कृति स्व. शिवमंगल सिंह का प्रभाव भी पद्धिति में साफ दृष्टिगोचर होता है ...वल्कि उनसे भी कहीं उन्नल ऊर्जा प्रवाह के लिये लिये साधुवाद rajendr prasad ji
जवाब देंहटाएंतन न आया माँगने अभिसार
जवाब देंहटाएंमन ही जुड़ गया था
मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था..........SUNDAR BHAAV..
http://boseaparna.blogspot.in/
बहुत खूब साब | सादर
जवाब देंहटाएंतन न आया माँगने अभिसार
जवाब देंहटाएंमन ही जुड़ गया था
मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
पथ ही मुड़ गया था...........बहुत गहन।
सुन्दर रचना !!
जवाब देंहटाएंबहुत ही सार्थक कविता का सृजन,आभार.
जवाब देंहटाएंबेहतरीन कविता सुन्दर भाव लिए.
जवाब देंहटाएंबड़ा ही उत्कृष्ट भावपूर्ण रचना.
जवाब देंहटाएंमैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
जवाब देंहटाएंपथ ही मुड़ गया था.
बहुत सुन्दर भाव.
utkrisht bhav,behtrin prstuti.
जवाब देंहटाएंbahut hi sundar prstutikaran,abhar.
जवाब देंहटाएंडाल झूमी, पर न टूटी
जवाब देंहटाएंकिंतु पंछी उड़ गया था
...बहुत गहन और सुन्दर प्रस्तुति...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
जवाब देंहटाएंआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (10-05-2013) के "मेरी विवशता" (चर्चा मंच-1240) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
आपका आभार है आदरणीय.
हटाएंumda , with deepest feelings
जवाब देंहटाएंबहुत गहराई मे लिखा है भाई ,,,,मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार
जवाब देंहटाएंपथ ही मुड़ गया था.
gehre bhav liye rachna
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर कविता ......
जवाब देंहटाएंbahut sundar rachna hai, rajendra ji. baar-baar padhne par bhi man nahin bharta. mujhe garv hai ki main aapka mitra hun.
जवाब देंहटाएंभावपूर्णरचना
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंsundar Rachna...
जवाब देंहटाएंबढ़िया रचना
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना, सुन्दर भाव प्रस्तुति आभार
जवाब देंहटाएंहिन्दी तकनीकी क्षेत्र कुछ नया और रोचक पढने और जानने की इच्छा है तो इसे एक बार अवश्य देखें,
लेख पसंद आने पर टिप्प्णी द्वारा अपनी बहुमूल्य राय से अवगत करायें, अनुसरण कर सहयोग भी प्रदान करें
MY BIG GUIDE
ati sundar ..warnan dil ke udgaaron ka ....
जवाब देंहटाएंVery Nice Poem Mai na aaya duar path hi mur gy tha
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