शनिवार, 24 अक्टूबर 2015

"आनन्द"

"आनन्द"
वह आनन्द क्या है,
"आनन्द" जिसे मैं खोज रहा हूँ?
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दौड़ जीतना  तो नहीं,
बल्कि असफलता का परिचय पाना है,
क्योकि इसी के द्वारा  मैंने दौड़ना सीखा है। 
संदेहों से भयभीत नही होना है,
क्योकि इन्होने ही मुझे दिखाया कि कहाँ पथ संकीर्ण है-
निकल पाना दुष्कर है। 
जब भी क्लान्ति और पीड़ा ने घेरा 
अपने चतुर्दिक फैली शक्तियों के माध्यम से 
मैं अपनी क्षमतावर्द्धन के मार्ग ढूंढ लेता हूँ। 
और खड़ा हो जाता हूँ-
विश्व संरचना की पंक्ति में 
चकित, विस्मित, पुलकित !

10 टिप्‍पणियां:

  1. असफलता ही सफलता का रास्ता दिखाती हैं...बहुत सुन्दर और सटीक प्रस्तुति...

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. बहुत खूब। शानदार रचना की प्रस्‍तुति।

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  4. बहुत सारगर्भित रचना, जीवन में ऊर्जा रहे तो हर नामुमकिन को मुमकिन किया जा सकता है, बधाई.

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  5. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

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  6. उम्मिदों से ही जीवन है। सुंदर प्रस्तुति...

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आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है,आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है, आपके कुछ शब्द रचनाकार के लिए अनमोल होते हैं,...आभार !!!