१.
बेछत घर
तड़पती जिन्दगी
झुलसते हैं
२.
व्याकुल मन
तपता अंगनारा
छाया सन्नाटा
३.
चुभती धूप
गर्मी से अकुलाये
छिपे परिन्दे
४.
थके पथिक
छाया को तरसते
जलते पांव
५.
आग लगाये
सूखे कण्ठ कोकिला
गर्मी के दिन
६.
पेड़ों की छाया
जेठ की दुपहरी
बात निराली
७.
हो रही शाम
लालिमा आकाश में
छिपता सूरज
८.
दिन तपता
खुद ही सिमटता


