रविवार, 26 जनवरी 2020

Happy Republic Day 2020 wish


सभी भारतवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं, 
मेरी दुआ है न लगे मेरे देश को किसी की नज़र,
महकता रहे यूं ही फूलों की तरह हर पल
जय हिन्द!
Happy Republic Day 2020
Happy Republic Day 2020 wish



इंसानियत ही है धर्म वतन का
बस जियो वतन के नाम पर
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं



शनिवार, 7 अप्रैल 2018

मैं तेरे आरजू से

मैं  तेरे आरजू से  सख्त  घायल  हो गया,
इस कदर चाहा की नीम पागल हो गया। 

रेत का अबंर रातो रात दलदल हो गया,
रोया कोई इस तरह की सहरा भी जलधल हो गया। 

आसुओं का इक समंदर जब्ज कर  के दोस्तों,
देखते ही  देखते वह  शख्स  बादल  हो गया। 

आदमी खूंखार व् वहशी  हो गए इस दौर में,
और उनकी मेहरबानी शहर जंगल हो गया। 

धूप भी सुहानी थी तुम्हारे साथ-साथ ,
तुम नहीं तो शाम का साया बोझिल हो गया। 

रात मैंने ऐसा ख्वाब देखा की क्या कहूँ,
तुझसे लिपटा मैं तेरा रंगीन आँचल हो गया। 

हाय वह चेहरा ख्याल आता है अब भी मुझे,
मेरी चश्मे याद से भी वो ओझल हो गया। 

उस सलोनी सूरत को आँखों में संजोये,
राज तेरी याद में पागल दीवाना हो गया। 


अज्ञात

शनिवार, 27 जनवरी 2018

गणतंत्र दिवस 2018-हार्दिक शुभकामनाएं

 "सभी देश वासियों को हमारे राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।"
 

भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान,
    दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान,
          सब धर्मो को देकर मान रचा गया इतिहास का,
                      इसलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास ||
                                     गणतंत्र दिवस की ढ़ेरो शुभकामनाए.

जय हिन्द , जय भारत 
वन्दे मातरम 





सोमवार, 14 अगस्त 2017

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें




आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें। 

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।

व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।

हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।

प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।

लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।

हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।

विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।


धन्यवाद-
सजीवन मयंक

बुधवार, 12 जुलाई 2017

पशुओं से बीस गुण सीखना चाहिए (Twenty qualities should be learned from animals)

सिंहादेकं बकादेकं शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटात्।
वायसात्पञ्च शिक्षेच्च षट् शुनस्त्रीणि गर्दभात्॥

पशुओं से २० गुण सीखना चाहिए

पशुओं से बीस गुण सीखना चाहिए (Twenty qualities should be learned from animals)

मनुष्य को सिंह से एक, बगुले से एक, मुर्गे से चार, कौए से पांच, कुत्ते से छः तथा गधे से सात बातें सिखने चाहिए ।-चाणक्य 

अर्थात, हमें गुण सीखने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए ताकि हमारे स्वभाव और आचरण में अच्छे गुणों की वृद्धि होती रहे। अगर हममें अच्छे गुण सीखने की लगन हो तो हम कहीं से भी सीख सकते हैं। ऊपर के श्लोक में यही बताया गया है की पशुओं से भी अच्छे गुण सीखा जा सकता है। सिंह से हमे क्या शिक्षा मिलती है चाणक्य मुनि कहते हैं- "कार्य थोड़ा हो या अधिक, उसको पूरा कर देना चाहिये, उसके लिये संध्या और प्रातःकाल का विचार नहीं करना चाहिये। यह शिक्षा सिंह से लेनी चाहिये है। मुर्गे के निम्न गुण हृदयगंम करने की सलाह चाणक्य देते हैं-"बहुत प्रातःकाल में जागना, रण के लिये उद्यत रहना, बन्धुओं को उचित विभाग देना और आप युद्ध करके भोग करना, ये चारों बातें कुक्कुट से सीखनी चाहिये। पांच बातें चतुर काग से भी सीखने के लिये चाणक्य कहते हैं-"छिपकर मैथुन करना, छिपकर चलना, किसी पर विश्वास न करना, सदा सावधान रहना, समय-समय पर संग्रह करना, ये पांच बातें हमें कव्वे से सीखनी चाहिये है। सबसे ज्यादा गुण चाणक्य ने श्वान से सीखने की सलाह दी हैं-"बहुत खाने की शक्ति होना, गाढ़ी निद्रा में रहना, शीघ्र जाग उठना, थोड़े से ही संतोष कर लेना, स्वामी की भक्ति करना, और शूरवीरता ये छहः गुण कुत्ते से सीखने चाहिये। दुनिया भर का बोझ ढ़ोने वाले, शान्त स्वभाव गर्दभ से भी मुनिवर सीखने की सलाह देते हैं-"अत्यंत थक जाने पर भी बोझ ढोते रहना, कभी सर्दी-गर्मी का ध्यान ही न करना, सदा संतोष के साथ विचरण करना, ये तीनों गुण गधे से सीखने चाहिये।

कहने का तातपर्य है जो मनुष्य इन २० गुणों को अपने आचरण और स्वभाव में धारण करेगा वह सब कार्यो में और सभी अवस्थाओं में सफल सिद्ध होगा और विजेता रहेगा।

शनिवार, 20 मई 2017

आतंकवादी

आतंकवादी
वे सब भी
हमारी ही तरह थे,
अलग से कुछ भी नहीं
कुदरती तौर पर

पर, रात अँधेरी थी
और, अँधेरे में पूछी गईं उनकी पहचानें
जो उन्हें बतानी थीं
और, बताना उन्हें वही था जो उन्होंने सुना था
क्योंकि देखा और दिखाया तो जा नहीं सकता था कुछ भी
अँधेरे में
और, अगर कहीं कुछ दिखाया जाने को था भी
तो उसके लिए भी लाज़िम था कि
बत्तियाँ गुल कर दी जाएँ

तो, आवाज़ें ही पहचान बनीं-
आवाज़ें ही उनके अपने-अपने धर्म,
अँधेरे में और काली आकारों वाली आवाज़ें
हवा भी उनके लिए आवाज़ थी, कोई छुअन नहीं
कि रोओं में सिहरन व्यापे ।
वो सिर्फ़ कान में सरसराती रही
और उन्हें लगा कि उन्हें ही तय करना है-
दुनिया में क्या पाक है, क्या नापाक


गोकि उन्हें पता था, किसी धर्म वग़ैरह की
कोई ज़रूरत नहीं है उन्हें अपने लिए
पर धर्म थे, कि हरेक को उनमें से
किसी न किसी की ज़रूरत थी
और यों, धर्म तो ख़ैर उनके काम क्या आता,
वे धर्म के काम आ गए ।

धर्म जो भी मिला उन्हें एक क़िताब की तरह मिला-
क़िताब एक कमरे की तरह,
जिसमें टहलते रहे वे आस्था और ऊब के बीच
कमरा-- खिड़कियाँ जिसमें थीं ही नहीं
कि कोई रोशनी आ सके या हवा
कहीं बाहर से
बस, एक दरवाज़ा था,
वह भी जो कुछ हथियारख़ानों की तरफ़ खुलता था
कुछ ख़ज़ानों की तरफ़

और इस तरह
जो भी कुछ उनके हाथ आता- चाहे मौत भी
उसे वे सबाब कहते
और वह जंग- जिसमें सबकी हार ही हार है
जीत किसी की भी नहीं,
उसे वे जेहाद कहते ।

-राजेन्द्र कुमार 

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

"महाशिवरात्रि कि हार्दिक शुभकामनायें-2017"



"ॐ नमः शिवाय "
आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनायें ।

हाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के दिव्य अवतरण का पर्व है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही शिवरात्रि कहलाती है। शिव पुराण की ईशान संहिता में वर्णित है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आदिदेव भगवान शिव कोटि सूर्य के समान प्रभाव वाले शिवलिंग रूप में प्रकट हुए। यह पावन पर्व बड़ी ही श्रद्धा और उल्लास के साथ फागुन के महीने में मनाया जाता है।महाशिवरात्रि के विषय में मान्यता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ का अंश प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात मौजूद रहता है।

महाशिवरात्रि से जुड़ी हुई कई पौराणिक कथाएं भी काफी प्रचलित हैं। एक ऐसी ही प्रेरणादायक कथा है चित्रभानु की। चित्रभानु नाम का एक शिकारी था। वह जंगल के जानवरों का शिकार कर अपना भरण-पोषण करता था। उसने एक सेठ से कर्ज ले रखा था लेकिन चुका नहीं पा रहा था एक दिन सेठ ने उसे शिव मठ में बंदी बना लिया संयोगवश उस दिन महाशिवरात्रि थी लेकिन इसका चित्रभानु को जरा भी भान न था। वह तल्लीनता से शिवकथा, भजन सुनता रहा। उसके बाद सेठ ने मोहलत देकर उसे छोड़ दिया। उसके बाद वह शिकार की खोज में जंगल में निकल पड़ा। उसने एक तालाब के किनारे बिल्व वृक्ष पर अपना पड़ाव डाल दिया। उसी वृक्ष के नीचे बिल्व पत्रों से ढका हुआ एक शिवलिंग भी था। शिकार के इंतजार में वह बिल्व पत्रों को तोड़कर नीचे फेंकता रहा जो शिवलिंग पर गिरते। कुछ शिवकथा का असर कुछ अंजाने में महाशिवरात्रि के दिन वह भूखा प्यासा रहा तो उसका उपवास भी हो गया, बिल्व पत्रों के अर्पण से अंजानें में ही उससे भगवान शिव की पूजा भी हो गई इस सबसे उसका हृद्य परिवर्तन हो गया व एक के बाद एक अलग-अलग कारणों से मृगों पर उसने दया दिखलाई। इसके बाद वह शिकारी जीवन भी छोड़ देता है और अंत समय उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कहानी का निष्कर्ष है कि भगवान शिव शंकर इतने दयालु हैं कि उनकी दया से एक हिंसक शिकारी भी हिंसा का त्याग कर करुणा की साक्षात मूर्ति हो जाता है। कहानी का एक अन्य सार यह भी है कि नीति-नियम से चाहे न हो लेकिन सच्चे मन से साधारण तरीके से भी यदि भगावन शिव का स्मरण किया जाये, शिवकथा सुनी जाये तो भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उपासक के सभी सांसारिक मनोरथ पूर्ण करते हुए उसे मोक्ष प्रदान करते हैं।


गुरुवार, 26 जनवरी 2017

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें




सभी भारतवासियों को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की हार्दिक शुभकामनायें।  समस्त भारतवासियों के लिए ये राष्ट्रीय पर्व खुशहाली और सम्रद्धि का सन्देश लेकर आये, यही इस पावन पर्व पर आप सभी के लिए हमारी हार्दिक शुभकामनाएं हैं।  


तिरंगा हमारा शान है, इस पर हमें गर्व है। 






गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

The Power of Thought


"Great person to live forever among us, the useful life of the world, several scholars have said the things we say in simple language that precious word for the precious things in our lives and by which we can communicate and new enthusiasm. this page is dedicated to those great men."

Change your thought
and
you change the world
The Power of Thought

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Continuous.........


शनिवार, 28 मई 2016

"दूसरों से शिक्षा लें "

एक कहावत है की आगे वाला गिरे तो पीछे वाला होशियार हो जाये। जो बुद्धिमान होते हैं वे दूसरों के हालात देखकर शिक्षा ले लेते हैं। यदि हम भी चाहें और अपने ज्ञानचक्षु खुले रखें तो हम कदम-कदम दुसरो शिक्षा ले सकते हैं। दूसरों का परिणाम देखकर नसीहत ले सकते हैं क्योकि प्रत्येक शिक्षा खुद हीअनुभव करके ग्रहण की जाय यह जरा मुशिकल काम है। आग से हाथ जल जाता है यह हमने सुना है और जाना है तो अब खुद हाथ जला कर देखने की जरूरत नही। जिन बुरे कामों के बुरे परिणाम दूसरे भोग रहे हैं उन्हें देखकर उन कामों को न करने की शिक्षा ग्रहणकर लेना चाहिए। जो दूसरों को गिरता देख कर सम्भल जाते हैं वे व्यक्ति वाकई बुद्धिमान हैं।

सोमवार, 7 मार्च 2016

"महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें"

"आप सभी दोस्तों को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ"

ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात
महाशिवरात्रि पर एक कथा इस प्रकार भी प्रचलित है। 
पुराणों में महाशिवरात्रि के बारे में कई कथाएँ हैं. उनमें से एक कथा के अनुसार एक बार विष्णु जी तथा ब्रह्मा जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद होने लगा. ब्रह्मा जी का मत था कि वह श्रेष्ठ हैं और विष्णु जी कहने लगे कि वह श्रेष्ठ हैं. ब्रह्मा जी तथा विष्णु जी के विवाद को सुनकर भगवान शिव एक लिंग के रुप में प्रकट हुए. यह शिवलिंग एक प्रकाश स्तम्भ के रुप में प्रकट हुआ था. ब्रह्माजी और विष्णु जी दोनों उस प्रकाश स्तम्भ के आदि तथा अंत की खोज में लग गए. लेकिन उन्हें प्रकाश स्तम्भ का आदि तथा अंत कुछ भी नहीं मिला.
ब्रह्मा जी ने इसके लिए झूठ का सहारा लेने की कोशिश की. उनकी इस हरकत से भगवान शिव क्रोधित हो गये और उन्होंने ब्रह्मा जी का पाँचवां सिर काट दिया. भगवान शिव के क्रोध को शांत करना कठिन कार्य था. इस पर विष्णु जी ने शिवजी का पूजन तथा उनकी आराधना की. बहुत दिन तक आराधना करने पर भगवान शिव विष्णु जी से प्रसन्न हुए. जिस दिन शिव प्रसन्न हुए उस दिन को महाशिवरात्रि के रुप में मनाया जाने लगा.
आप सभी की हर मनोकामनाएं देवो के देव भगवान शिव पूरी करें। 
"हर हर महादेव" 

रविवार, 28 फ़रवरी 2016

"अपने आप को जानें और पहचानें"

हमारी ज्यादा रूचि सिर्फ दूसरों को जानने और अपनी जान पहचान बढ़ाने में ही रहती है, खुद अपने को जानने में नहीं रहती। हमारी यह भी कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक लोग हमें जानें, हम लोकप्रिय हों पर यह कोशिश हम जरा भी नहीं करते कि हम खुद के बारे में जानें कि हम क्या हैं, क्यों हैं, क्यों पैदा हुए हैं, किसलिए पैदा हुए हैं। हम हमारे बारे में जो कुछ जानते हैं वह दरअसल हमारे खुद के बारे में जानना समझते हैं जबकि यह एक गलतफहमी है क्योकि जो जो 'हमारा' है वह 'हम' नहीं हैं, यहां तक की हमारा 'शरीर' भी दरअसल 'हम' नहीं बल्कि 'हमारा' है। इस स्थिति से हमारा बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। हमारा जीवन व्यतीत होता जा रहा है और हमें अभी तक यहीं मालूम नहीं है कि हम क्या हैं, क्यों है आदि। हमारा पूरा ध्यान बाहरी धन सम्पदा, परिवार, मकान, दुकान, घर गृहस्थी पर लगाये रहते हैं, और जो असली हम हैं उसे याद तक नही करते। इससे हम बाहर बाहर भले ही सम्पन्न हों, पर भीतर से दरिद्र होते जा रहें हैं। इसको समझने के लिए एक बोध कथा को देखते हैं।   
                                               "एक बहुत बड़े भवन में आग लग गई और तेज हवा के कारण देखते-देखते आग पूरे भवन में फ़ैल गई।  आग को बुझाने के लिए घर के लोग और पड़ोसी मिलकर सामान निकलने लगे।  मकान मालिक के परिवार का हाल बेहाल था और उन्हें कुछ सूझ नही रहा था। सामान निकालने वालों ने पूछा की कुछ और अंदर तो नही रह गया है, हमें बता दो। घर के लोग बोले -हमारे होश ठिकाने नहीं है, कृपया आप ही लोग देख लें। थोड़ी देर में आग पर काबू पाया गया तो घर का मालिक दिखाई नही दे रहा था जबकि आग लगने के पहले घर में ही सो रहा था।  घर वाले रोने पीटने लगे।  सबने मिलकर जो जो हमारा था वह तो बचा लिया पर इसका ज्ञान किसी को नही था की मकान मालिक अंदर सो रहा है सो वह अंदर ही जल गया।  ऐसा ही हमारे बारे में हो रहा है।  हम समान बचाने में लगे हुए हैं और खुद का हमें पता नही। "

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

निदा फाजली: भावपूर्ण श्रद्धांजलि!

मशहूर शायर और फिल्म गीतकार निदा फाजली का 78 वर्ष की उम्र में सोमवार को मुंबई के वर्सोवा स्थित घर पर निधन हो गया। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। सोमवार दोपहर को हार्ट अटैक से उनकी सांसे थम गईं। निदा फाजली साहित्य अकादमी, पद्म श्री सम्मान से सम्मानित थे।निदा फाजली का जन्म 1938 में दिल्ली के कश्मीरी परिवार में हुआ था। उनका बचपन और जवानी ग्वालियर में बीता। यहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। 1957 में ग्वालियर कॉलेज से ग्रैजुएट हुए फाजली ने छोटी उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। वर्ष 2013 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से और सांप्रदायिक सद्भाव पर लेखन के लिए उन्हें ‘राष्ट्रीय सद्भाव पुरस्कार’ से भी नवाजा गया था।
      निदा फाजली (फाइल फोटो)
भावपूर्ण श्रद्धांजलि!


दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है

अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है

आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है

गुरुवार, 14 जनवरी 2016

"मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें"

 
मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रान्ति पूरे भारत में किसी न किसी रूप में अवश्य मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। नेपाल में भी सभी प्रान्तों में अलग-अलग नाम व भाँति-भाँति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।इस दिन गंगा-स्नान का विशेष महत्व है। 
                         मकर संक्रांति पर रसोई में तिल और गुड़ के लड्डू बनाए जाने की परंपरा है। इसके पीछे बीती कड़वी बातों को भुलाकर मिठास भरी नई शुरुआत करने की मान्यता है।  अगर वैज्ञानिक आधार की बात करें तो तिल के सेवन से शरीर गर्म रहता है और इसके तेल से शरीर को भरपूर नमी भी मिलती है। मकर संक्रांति स्नान के साथ ही दान का भी पर्व है। मौसमी विधान के अनुसार इस तिथि विशेष पर गरम तासीर वाली वस्तुओं के दान  का भी प्रावधान है। दान में काला तिल, खिचड़ी, साग सब्जी, गर्म वस्त्र का विशेष मान है। मान्यता है कि दान से धन धान्य में वृद्धि और मनोकामना पूर्ति होती है। 
बचपन से ही देखता आया हूँ हमारे यहाँ मकर संक्रांति के दिन सुबह उठकर पवित्र स्नान कर सूर्य भगवान को जल अर्पित करने के बाद चावल, दाल और गुड का स्पर्श करते हैं फिर उसे दान करते हैं। तिल और गुड के बने तिलकुट खाने के बाद दही और चिउड़ा(पोहा) को गुड के साथ खाते हैं।चावल और उड़द की खिचड़ी भी घर में बनाया जाता है। पतंगवाजी का भी प्रचलन है पर अब धीरे धीरे कम हो रहा है। इस अवसर पर मेले का भी आयोजन किया जाता है।
 

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

"नववर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनायें"


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आप सबको नया साल 2016 की हार्दिक शुभकामनायें । नूतन बर्ष आपके एवं आपके परिवार के लिए हर्षोल्लास,अच्छा स्वास्थ्य,सम्पन्नता ,सुरक्षा, नव ज्योत्स्ना,नव उल्लास और समृधि लेकर आए ।मित्रों इस नव वर्ष के आगमन पर हम सब एक संकल्प लें कि आज से हम आपने नकारात्मक विचारों को त्याग कर सकारात्मकता की और कदम बढाने का प्रयास करें, क्योंकि सकारात्मकता ही जीवन में उर्जा और उत्साह का संचार करती है। आइये सकारात्मकता से परिपूर्ण एक नई सुबह का स्वागत करें। और अपने भावी जीवन को असीम उर्जा की तरंगों से आंदोलित करें।

सुनहरे सपनों की झंकार, लाया है नववर्ष
खुशियों के अनमोल उपहार लाया है नववर्ष
आपकी राहों में फूलों को बिखराकर लाया है नववर्ष
महकी हुई बहारों की ख़ुशबू लाया है नववर्ष
अपने साथ नयेपन का तूफान लाया है नववर्ष
स्नेह और आत्मीयता से आया है नववर्ष
सबके दिलों पर छाया है नववर्ष
आपको मुबारक हो दिल की गराईयों से नववर्ष!


रविवार, 29 नवंबर 2015

जनता का हक़-ग़ज़ल


जनता का हक़ मिले कहाँ से, चारों ओर ‪दलाली है |
‪चमड़े का दरवाज़ा है और ‪कुत्तों की रखवाली है ||

‪मंत्री, नेता, अफसर, मुंसिफ़ सब जनता के सेवक हैं |
ये जुमला भी प्रजातंत्र के मुख पर ‪भद्दी गाली है ||

उसके हाथों की ‪कठपुतली हैं सत्ता के ‪शीर्षपुरुष |
कौन कहे संसद में बैठा ‪गुंडा और मवाली है ||

सत्ता ‪बेलगाम है जनता ‪गूँगी बहरी लगती है |
कोई उज़्र न करने वाला कोई नहीं ‪सवाली है ||

सच को यूँ ‪मजबूर किया है देखो झूठ बयानी पर |
‪माला फूल गले में लटके पीछे सटी ‪दोनाली है ||

‪दौलत शोहरत बँगला गाड़ी के पीछे सब भाग रहे हैं |
‪फसल जिस्म की हरी भरी है ‪ज़हनी रक़बा खाली है ||

‪सच्चाई का जुनूँ उतरते ही हम ‪मालामाल हुए |
हर सूँ यही हवा है ‪रिश्वत हर ताली ताली है ||

वो ‪सावन के अंधे हैं उनसे मत पूँछो रुत का हाल |
उनकी खातिर हवा ‪रसीली चारों सूँ ‪हरियाली है ||

‪पंचशील के नियमो में हम खोज रहे हैं सुख साधन |
चारों ओर ‪महाभारत है दाँव चढ़ी ‪पञ्चाली है ||

पहले भी ‪मुगलों-अंग्रेजो ने जनता का ‪‎खून पिया |
आज 'विप्लवी' भेष बदलकर नाच रही खुशहाली है ||

साभार :- बी. आर. विप्लवी

शनिवार, 24 अक्टूबर 2015

"आनन्द"

"आनन्द"
वह आनन्द क्या है,
"आनन्द" जिसे मैं खोज रहा हूँ?
दौड़ जीतना  तो नहीं,
बल्कि असफलता का परिचय पाना है,
क्योकि इसी के द्वारा  मैंने दौड़ना सीखा है। 
संदेहों से भयभीत नही होना है,
क्योकि इन्होने ही मुझे दिखाया कि कहाँ पथ संकीर्ण है-
निकल पाना दुष्कर है। 
जब भी क्लान्ति और पीड़ा ने घेरा 
अपने चतुर्दिक फैली शक्तियों के माध्यम से 
मैं अपनी क्षमतावर्द्धन के मार्ग ढूंढ लेता हूँ। 
और खड़ा हो जाता हूँ-
विश्व संरचना की पंक्ति में 
चकित, विस्मित, पुलकित !